
CRS NEWS AGENCY:-मुख्य घटनाएं और दावे: 11,सितंबर, 2025 को नितीश राजपूत ने “Reality of SSC Exam” शीर्षक से एक वीडियो जारी किया, जिसमें SSC परीक्षाओं में पेपर लीक और कुप्रबंधन का पर्दाफाश करने का दावा किया गया।
Eduquity ने नितीश राजपूत के खिलाफ ₹2.5 करोड़ का मानहानि का मुकदमा दायर किया है। कंपनी का कहना है कि वीडियो में भ्रामक जानकारी है जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने वीडियो हटाने की मांग की है।
स्थापना: SSC की स्थापना 4 नवंबर, 1975 को सरकारी नौकरियों के लिए सामान्य परीक्षा आयोजित करने के लिए की गई थी।
संवैधानिक स्थिति: UPSC के विपरीत, SSC के पास संवैधानिक सुरक्षा नहीं है, जिससे यह सीधे सरकार के नियंत्रण में रहता है।
निजीकरण की शुरुआत: 2012 तक कार्यभार बढ़ने के कारण देरी और पेपर लीक होने लगे। 2013 में CBI जांच के बाद, कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) शुरू किए गए, जिससे निजी कंपनियों का प्रवेश हुआ।
कंपनियों का सफर: * सबसे पहले Sify Technologies को टेंडर मिला, लेकिन सर्वर डाउनटाइम जैसी समस्याएं आईं।
बाद में TCS ने टेंडर जीता जब बड़े स्तर की कंपनियों के लिए कड़े नियम बनाए गए।
विवाद तब शुरू हुआ जब टेंडर TCS से बदलकर Eduquity को दे दिया गया।
विवाद का मुख्य कारण:
नितीश राजपूत ने आरोप लगाया कि Eduquity को टेंडर दिलाने के लिए 50 लाख छात्रों की क्षमता वाले मानदंड को घटाकर 10 लाख कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि Eduquity की परीक्षाओं में तकनीकी खामियां और खराब प्रबंधन देखा गया है।
वर्तमान स्थिति:
SSC का जवाब: SSC का कहना है कि Eduquity ने सरकारी नियमों के आधार पर TCS से बेहतर स्कोर किया, इसलिए उन्हें टेंडर मिला।
नितीश का पक्ष: उन्होंने वीडियो हटाने से इनकार कर दिया है, उनका कहना है कि उनके दावे सार्वजनिक रिकॉर्ड और छात्रों के बयानों पर आधारित हैं।
निष्कर्ष: यह कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन इसके बीच में उन लाखों छात्रों का भविष्य अटका हुआ है जो हर साल इन परीक्षाओं के सिस्टम की खामियों से प्रभावित होते हैं।










