
CRS NEWS: सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही उस समय भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान एक पत्रिका में प्रकाशित सामग्री का हवाला देने लगे। राहुल गांधी भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की कथित अप्रकाशित आत्मकथा से जुड़े अंश पढ़ना चाहते थे, जिस पर सत्ता पक्ष ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई।
राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य में कहा कि कारवां पत्रिका में छपे अंश स्वयं जनरल नरवणे के संस्मरण पर आधारित हैं, जिन्हें सरकार प्रकाशित नहीं होने दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल पाँच पंक्तियाँ पढ़ना चाहते हैं, जो देश की सुरक्षा, विदेश नीति और समग्र स्थिति से जुड़ी हैं।
उनके इस प्रयास पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक कोई पुस्तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित न हो, तब तक उसका उल्लेख सदन में करना अनुचित है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी पत्रिका की सामग्री को किसी व्यक्ति की किताब के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन की मर्यादा और नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अप्रमाणिक दस्तावेज़, अप्रकाशित किताबें या अख़बारों की कटिंग पर चर्चा की परंपरा संसद में नहीं रही है। इसके बावजूद राहुल गांधी ने दावा किया कि जिस सामग्री का वे उल्लेख कर रहे हैं वह पूरी तरह प्रमाणिक है।
हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संसद के नियम 349 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी सामग्री, जिसका सदन की कार्यवाही से सीधा संबंध न हो, उसे पढ़ा नहीं जा सकता। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा उठाया। वहीं बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
दूसरी ओर विपक्षी दल राहुल गांधी के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि जनरल नरवणे देश के सेना प्रमुख रहे हैं और उनकी बातों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी कभी सेना का अपमान नहीं कर सकते और सरकार उन मुद्दों से बचना चाहती है जो उसके लिए असहज हैं।
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि चीन, डोकलाम और लद्दाख जैसे गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर सवाल उठाने से विपक्ष को रोका जा रहा है और तकनीकी आपत्तियों के ज़रिये बहस को दबाया जा रहा है।
कुल मिलाकर, यह पूरा घटनाक्रम संसद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, नियमों की व्याख्या और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म देता नज़र आया।









