
CRS NEWS अफगानिस्तान में तालिबान महिलाओं के लिए नए सख्त कानून लागू किए हैं। महिलाओं को घर से बाहर बोलने पर प्रतिबंध लगाया गया है, और सार्वजनिक स्थानों पर उनके शरीर और चेहरे को कपड़े से ढकने का आदेश दिया गया है। अंग्रेजी अखबार द गार्जियन के अनुसार, तालिबान ने इन कानूनों की वजह बताते हुए कहा है कि महिलाओं की आवाज सुन कर पुरुषों का ध्यान भटक सकता है, इसलिए उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर बोलने की आज़ादी नहीं दी जा सकती ।
तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबातुल्लाह अखुंदजादा ने इन कानूनों को मंजूरी दी है, जिन्हें हलाल और हराम की दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इस फैसले की संयुक्त राष्ट्र और कई मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है। तालिबान ने महिलाओं के घर में गाने और तेज आवाज में पढ़ने पर भी रोक लगा दी है। नए कानूनों का उल्लंघन करने पर महिलाओं या लड़कियों को सख्त सजा दी जाएगी।
इस बार तालिबान ने पुरुषों पर भी कुछ प्रतिबंध लगाए हैं। पुरुषों को घर से बाहर निकलते समय अपने शरीर को घुटनों तक ढकने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर खींचने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
अफगानिस्तान में तालिबान के वापस सत्ता में आने के बाद महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं। 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान की सत्ता तालिबान के हाथों में आने के बाद से महिलाओं पर प्रतिबंध और कठोर कानूनों का सिलसिला जारी है। पहले, महिलाओं से सरकारी नौकरियां छीन ली गईं, फिर उनकी शिक्षा पर पाबंदियां भी लगा दी गईं, जिससे वे केवल छठी कक्षा तक ही पढ़ाई कर सकती हैं।
तालिबान ने सत्ता में आने के बाद कई ऐसे कानून लागू किए हैं जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है सार्वजनिक स्थानों पर सजा देना।
तालिबान ने इस साल जून में समलैंगिक संबंधों के आरोप में 63 लोगों को कोड़े मारने की सजा दी थी, जिसमें 14 महिलाएं भी शामिल थीं। तालिबान समलैंगिकता को इस्लाम के खिलाफ मानता है और सरी पुल प्रांत के एक स्टेडियम में इन लोगों को सार्वजनिक रूप से कोड़े मारे गए।
मार्च में, तालिबान के सुप्रीम लीडर मुल्ला हिबातुल्लाह अखुंदजादा ने एक फरमान जारी किया जिसमें एडल्ट्री के दोषियों को पत्थरों से मारकर मौत की सजा देने का आदेश दिया गया था। उन्होंने इस्लामिक कानून शरिया को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया, और कहा कि दोषी महिलाओं को सार्वजनिक रूप से कोड़े और पत्थर मारे जाएंगे।










