
CRS NEWS AGENCY:- जांच की शुरुआत: 3 जनवरी को हिमालय कंपनी ने शिकायत की थी कि बाजार में उनकी दवा की नकली प्रतियां बेची जा रही हैं। इसके बाद पुलिस ने सैंपल्स इकट्ठा कर जांच शुरू की।
8 फरवरी को पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम मयंक अग्रवाल, अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी हैं।
पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामान जब्त किया:
लगभग 50,000 नकली Liv.52 गोलियां।
500 रैपर शीट और 1200 ढक्कन।
1200 प्लास्टिक की डिब्बियां और एक कार।
निर्माण और नेटवर्क: * नकली दवाइयां सोनीपत की ‘सुबको लैबोरेटरीज’ में बनाई जाती थीं।
पैकिंग सामग्री मेरठ के ‘एकता प्लास्टिक उद्योग’ से और रैपर एक प्रिंटिंग प्रेस से मंगवाए जाते थे।
मुनाफा: एक नकली डिब्बी बनाने की लागत लगभग 35-40 रुपये आती थी, जिसे बाजार में 100 रुपये में बेचा जाता था।
स्वास्थ्य जोखिम: पुलिस और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये नकली दवाएं सेहत, खासकर लिवर के लिए बहुत खतरनाक हो सकती हैं।
पुलिस अभी भी इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।









