CRS NEWS AGENCY:- वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में एक चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर भारत खुद को ‘विश्वगुरु’ और वैश्विक शांति दूत के रूप में पेश करता रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान एक प्रमुख मध्यस्थ (Intermediary) के रूप में उभरा है। 26 मार्च 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा है।
1. विपक्ष के तीखे प्रहार: ‘कूटनीतिक विफलता’ का आरोप
भारतीय राजनीति में इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और अन्य नेताओं (जैसे जयराम रमेश) का आरोप है कि:
पाकिस्तान ने कूटनीतिक बढ़त बना ली है, जिससे भारत क्षेत्र में अलग-थलग पड़ गया है।
मोदी सरकार के ‘पाकिस्तान को अलग-थलग करने’ के दावे के बावजूद, अमेरिका और ईरान दोनों ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है।
विपक्ष इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी सैन्य सफलताओं के बाद एक बड़ी कूटनीतिक हार के रूप में देख रहा है।
2. सरकार का रुख और प्रधानमंत्री की पहल
भारत सरकार ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया में शांति बहाली का समर्थन किया।
भारत का आधिकारिक स्टैंड ‘तनाव कम करने’ और ‘शांति’ पर केंद्रित है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान की भूमिका को ‘दलाल’ (Broker) के काम से तुलना करते हुए इसे भारत के कद से नीचे बताया है। उनके अनुसार, भारत संदेश ले जाने वाला ‘एजेंट’ नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति है।
3. पाकिस्तान की भूमिका का विश्लेषण
ईरान के राजदूत और अंतरराष्ट्रीय मीडिया (जैसे Financial Times और Al Jazeera) ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान:
अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान तक पहुँचाने का काम कर रहा है।
इस्लामाबाद को वार्ता के संभावित स्थल के रूप में पेश किया जा रहा है।
इस भूमिका को मलेशिया, तुर्की और मिस्र जैसे देशों का भी समर्थन मिल रहा है।










