
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा का गांव सभी सुविधाओं से है वंचित इसका जिम्मेदार कौन
सह संपादक इंतजार सिंह
गदागंज -रायबरेली -:अगर हम बात करें रायबरेली जिले की तो सड़कों को लेकर बहुत बड़ी बत्तर व्यवस्था है हम बात करें 7 जनवरी 1921 मुंशीगंज गोलीकांड की तो भारत जिस समय ब्रिटिश दास्ता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ हर श्वास में मुक्ति पाने के लिए संघर्षरत था रायबरेली के सपूतों ने स्वाधीनता का प्रथम संग्राम राणा बेनी माधव सिंह की अध्यक्षता में लड़ा और अपनी शक्ति का लोहा मनाया स्वतंत्रता संघर्ष के इस पावन अनुष्ठान में अपने ही हाथों ने खलल डालने का कुचक्र रचा जिसमें रायबरेली का किसान आंदोलन अतिरंजित अत्याचार के विरुद्ध पूरे देश में किसानों ने विदेशी शासकों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध समय-समय पर अपने शक्ति का दमन किया रायबरेली का किसान आंदोलन संपूर्ण राष्ट्र के हुक्मरानों की नींद उड़ाने में सफल रहा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा की बात की जाए तो जहां रायबरेली जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने रेल कोच कारखाना लालगंज रायबरेली में आकर कहा था कि हम ऐसी पावन भूमि पर आए हैं जहां पर पंडित अमोल शर्मा बाबा जानकी दास बद्री नारायण सिंह जैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के वीर सपूत थे लेकिन अगर बात की जाए तो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा के गांव को जाने के लिऐ ना तो कोई पक्की सड़क है ना ही कोई स्कूल की व्यवस्था है और ना ही कोई हॉस्पिटल है हम आपको बता दें कि हर वर्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा की कलश यात्रा कीचड़ बोदा जैसी बत्तर गलियारा से निकाली जाती है चुनाव को मद्देनजर रखते हुए नेता आते हैं और कहते हैं कि बस कल से काम चालू हो जाएगा एक स्कूल और यह पक्की सड़क स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा के ग्रामसभा तक बनेगी ऐसा हम कई सालों से सुनते आ रहे हैं और देखते भी आ रहे हैं लेकिन सिर्फ कहने को कहा जाता है कि यह पावन धरती स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा जैसे वीरों की पावन भूमि है लेकिन अगर बात की जाए तो धरातल पर सिर्फ नेताओं द्वारा आश्वासन दिया जाता है लेकिन धरातल पर कुछ भी देखने को नहीं मिलता आज भी यहां के आसपास के करीब 1 दर्जन से अधिक ग्राम सभाएं हैं जो स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा के गांव से होकर गुजरते हैं और कहते हैं कि नेता जी ने तो कहा था कि मैं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा की गांव तक पक्की सड़क बनाएंगे लेकिन आज तक ना किसी अधिकारी और ना किसी नेता के द्वारा ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया कि जिससे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा को आए दिन याद किया जा सके 1 साल बीतने के बाद फिर कलश यात्रा में बड़े-बड़े नेता और विधायक आएंगे और फोटो खिंचवा कर आश्वासन देकर चले जाएंगे, यहां की जनता नेताजी की कही हुई बातों का इंतजार ही किया करती है कि कब हमारे गांव की तरफ ईटा गिट्टी पत्थर गिरेगी और रोड बनेगा जनता यही राह देखती रहती है फिर अगले बरस कलश यात्रा की तैयारी करने लगती है लेकिन निराशा जस की तस बनी रहती है अब देखना यह है कि किस नेता या अधिकारी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित अमोल शर्मा के गांव की तरफ निगाह डाली जाती है या फिर सारी सरकारी योजनाओं से यह गांव वंचित ही रह जाएगा और यह इसी तरह देश के वीर सपूतों का इतिहास मिट्टी में ही दबकर खत्म हो जाएगी,










