
रिपोर्ट BY- फैसल
CRS NEWS हरदोई। जनता ने नेताओं को चुनौती देने के लिए नहीं, समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना है। मां का दूध हर किसी ने पिया है, लेकिन लोकतंत्र में असली ताकत भाषा की मर्यादा, काम की ईमानदारी और जनता के विश्वास से साबित होती है। सिर्फ ललकार से राजनीति नहीं चलती, जनता जवाब काम से मांगती है।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
बाकी हमारा 2017 के नगर निकाय चुनाव से प्रारम्भ आन्दोलन “आओ निकलें मकानों से-जंग लड़ें बेईमानों से“ अब ’मां के दूध की शक्ति’ की आजमाइश भी होगा और उस ’शक्ति स्वरूपा’ जिनके ’भौतिक आशीर्वाद’ से हम अभी ही वंचित हुए हैं, उसके दूध का कर्ज उतारने का पुनः उद्घोष भी, हरदोई की देवतुल्य श्रद्धेय जनता हमें 2017 की भांति ’विजय श्री’ का आशीर्वाद दे और परिणाम पिछली बार बेइमानी से लुटने से बचाए, ये भी जिम्मेदारी निभानी है।
“आओ निकलें मकानों से-जंग लड़ें बेईमानों से“










