
पर्यावरण लगातार दूषित होने से बढ़ रही हैं जीवन समस्याएं!
प्रदूषण कर मनुष्य, स्वंय ही अपना दुश्मन बन रहा है!
(CRS इमरान साग़र की क़लम से)
पर्यावरण के साथ मानव जिस प्रकार खिलबाड़ कर रहा है उससे, स्वच्छ होने की बजाय और भी दूषित होता जा रहा है! फैक्ट्रियों का गंदा और कैमिकल युक्त जहरीला पानी, नालो के रास्ते, नहरो और नदियों में पहुंचने से और शहरो, नगरो का कूंड़ा कचरा नदियों और नहरो के किनारे जमा होने से, वातावरण स्वच्छ नही बल्कि और भी जहरीला होता जा रहा है!
नए युग में तेजी से प्रवेष कर रहे मानव जीवन को, प्राकृतिक हवाओं में भी अब अक्सर जहरीले पदार्थ मिले होने के कारण सांस, दमा और दिल की बिमारियों की शिकायत आम बात बनती देखने को मिल रही है! हालांकि यह खतरनाक़ है लेकिन इसके बाद भी इसे अभी पूरी तरह गंभीरता से नही लिया जा रहा है!
प्रकृति द्वारा निर्मित वस्तुओं के अवशेष को, जब मानव निर्मित वस्तुओं के अवशेष के साथ मिला दिया जाता है तब दूषक पदार्थों का निर्माण होता है! इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि दूषक पदार्थों का पुनर्चक्रण नही किया जा सकता है! किसी भी कार्य को पूर्ण करने के पश्चात् अवशेषों को पृथक रखने से इनका पुनःचक्रण वस्तु का वस्तु एवं उर्जा में किया जाता है!
बताया जाता है, पृथ्वी का वातावरण स्तरीय है! पृथ्वी के नजदीक लगभग 50 किमी ऊँचाई पर स्ट्रेटोस्फीयर है जिसमें ओजोन स्तर होता है! यह स्तर सूर्यप्रकाश की पराबैगनी (UV) किरणों को शोषित कर उसे पृथ्वी तक पहुँचने से रोकता है! वर्तमान में ओजोन स्तर का तेजी से विघटन हो रहा है, वातावरण में स्थित क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण ओजोन स्तर का विघटन हो रहा है!
जानकारो की मानो तो यह सर्व प्रथम 1980 के वर्ष में नोट किया गया कि ओजोन स्तर का विघटन सम्पूर्ण पृथ्वी के चारों ओर हो रहा है! दक्षिण ध्रुव विस्तारों में ओजोन स्तर का विघटन 40%-50% हुआ है! इस विशाल घटना को ओजोन छिद्र (ओजोन होल) कहतें है! मानव आवास वाले विस्तारों में भी ओजोन छिद्रों के फैलने की संभावना हो सकती है!
खबर है कि ओजोन स्तर के घटने के कारण ध्रुवीय प्रदेशों पर जमा बर्फ पिघलने लगा है तथा मानव को अनेक प्रकार के चर्म रोगों का सामना करना पड़ रहा है! ये रेफ्रिजरेटर और एयरकण्डीशनर में से उपयोग में होने वाले फ़्रियोन और क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस के कारण उत्पन्न हो रही समस्या है! आज हमारा वातावरण दूषित हो गया है! वाहनों तथा फैक्ट्रियों से निकलने वाले गैसों के कारण हवा (वायु) प्रदूषित होती है! मानव कृतियों से निकलने वाले कचरे को नदियों में छोड़ा जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है! लोंगों द्वारा बनाये गये अवशेष को पृथक न करने के कारण बने कचरे को फेंके जाने से भूमि (जमीन) प्रदूषण होता है! प्रदुषण कई प्रकार के होते है – (1)जल प्रदुषण , (1)वायु प्रदुषण , (3)ध्वनि प्रदुषण (4) मृदा प्रदूषण आदि प्रकार बताए जाते हैं!











