
CRS- पूरी दुनिया जब कोरोना वायरस के कारण अपने-अपने घरों में थी और हर जगह लॉकडाउन लगा हुआ था और जगह-जगह मौतों के आंकड़ों में लगातार वृद्धि हो रही थी तब दुनिया का एक देश था जो दावा कर रहा था कि उसके यहां तो कोरोना है ही नहीं। वह देश है नॉर्थ कोरिया। 12 मई को किम जोंग उन के नॉर्थ कोरिया ने ये मान लिया कि हमारे यहां भी कोरोना का एक केस आ गया है। नॉर्थ कोरिया में कुछ दिन पहले कोविड-19 के पहले केस की आधिकारिक पुष्टि की गई है। अब जैसे ही पहला केस आया देशभर में लॉकडाउन लग गया है। रविवार 15 मई को ख़बर आई है कि बुख़ार से 15 लोगों की मौत हो गयी। नॉर्थ कोरिया की राष्ट्रीय मीडिया KCNA की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि इस बीमारी के अब तक 8 लाख से ऊपर केस सामने आ चुके हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया कि अब तक बुख़ार से 42 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 8 लाख 20 हजार 620 केस सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब 3 लाख 24 हजार 550 लोगों का इलाज अब भी चल रहा है। मीडिया ख़बरों की माने तो नॉर्थ कोरिया में ये कोरोना का सबसे बड़ा अटैक है।
जब पहले कोविड-19 केस की पुष्टि हुई तो पूरे नॉर्थ कोरिया में कड़े नियम लागू कर दिए गए. उत्तर कोरिया ने इमरजेंसी क्वारंटीन सिस्टम को भी काफी सख़्ती से पालन करने के आदेश दिए थे। ताकि, वैक्सीन न लगवाए हुए लोगों से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो सके। इससे पहले उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति किम जोंग उन ने कहा था कि इस महामारी ने देश में बहुत उथल-पुथल मचा दी है। वहीं, KCNA रिपोर्ट में कहा गया कि देश के हर प्रांत, शहर और काउंटी में पूरी तरह से लॉकडाउन लगा दिया गया है।
KCNA ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया है कि नए मामले और जिनकी मौत हुई वो कोरोना पॉजिटिव है। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी संख्या में टेस्ट और जांच होना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वहीं, इन सबके बीच चिंता की बात ये भी है कि उत्तर कोरिया में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद खराब है। दुनिया के सबसे बुरी सुविधाओं में से एक माना जाता है। यहां कोविड वैक्सीन नहीं है, एंटीवायरल ड्रग्स और मास टेस्टिंग कैपेसिटी की भी कमी है।










