काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान का तृतीय वार्षिकोत्सव! देश के तमाम साहित्यकारों ने किया कार्यक्रम में प्रतिभाग! 
CRS बदायूँ-साहित्यकार दीप्ति सक्सेना द्वारा 17 फ़रवरी 2021 को स्थापित काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान का तृतीय वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया! प्रतियोगिताओं का आयोजन, ई-बाल पत्रिका दीया का विमोचन, काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया!
इस मौके पर संस्थान में अपनी सक्रियता और लेखनी शक्ति के प्रयोग से साहित्य संवर्धन करने के कारण शाहजहाँपुर के विख्यात कवि डॉ. प्रदीप वैरागी, कानपुर की मधुर कंठ कवयित्री श्रीमती पूनम पांडेय और गाज़ियाबाद की नवोदित बाल साहित्यकार श्रीमती कुमकुम गुप्ता को काव्यदीप रत्न -2024 सम्मान प्रदान किया गया!
लघुकथा प्रतियोगिता में राजवीर सिंह ‘तरंग’, बदायूँ, ने प्रथम, नीना महाजन, गाज़ियाबाद ने द्वितीय एवं अनुजा दुबे ‘पूजा’ वरुण , महाराष्ट्र ने तृतीय स्थान प्राप्त किया! इसके अतिरिक्त मनोज सक्सेना ‘मनोज”, बरेली, यूपी और रीमा काँमड़े, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया!
कविता प्रतियोगिता में राज शुक्ल “ग़ज़लराज” बरेली, उत्तरप्रदेश ने प्रथम, प्रियांशु सक्सेना गाज़ियाबाद उत्तरप्रदेश ने द्वितीय तथा रश्मि अग्रवाल (विलासपुर छत्तीसगढ़) ने तृतीय स्थान पाया! दो सांत्वना पुरस्कार सुधीर श्रीवास्तव, (गोण्डा यूपी) तथा निशा सक्सेना (गाज़ियाबाद) को दिए गये!
काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान के फेसबुक पटल पर एक काव्यगोष्ठी का आयोजन भी किया गया! इसमें तीनों काव्यदीप रत्न- 2024 का सम्मान किया गया! उन्हें सम्मान पत्र और स्मृति चिह्न भेंट की गयी! सर्वप्रथम मंच संचालक दीप्ति सक्सेना द्वारा सरस्वती वंदना की गई तत्पश्चात कार्यक्रम के आमंत्रित कवि गणों का स्वागत किया गयाो इसके बाद में काव्यदीप रत्न -2024 को सम्मानित करने के बाद संस्थान की ई- बाल पत्रिका दीया के जनवरी-फरवरी अंक 2024 का विमोचन किया गया! इसकी प्रधान संपादिका दीप्ति सक्सेना और डिज़ाइनर प्रियांशु सक्सेना हैं!
इसके उपरांत काव्यगोष्ठी आरंभ हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री सुधीर श्रीवास्तव जी ने की। कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए सर्वप्रथम प्रियांशु सक्सेना जी ने काव्यदीप को शुभकामनाएँ देते हुए पढ़ा-” हुआ काव्य का दीप प्रज्जवलित, जिसका नाम है काव्यदीप! दीप्ति अलौकिक ऐसी उसकी, ज्यूँ जलते हों कोटि प्रदीप!
इसके बाद प्रसिद्ध कवि डॉ. अनुराग पांडेय जी ने ग़ज़ल सुनाकर वाहवाही बटोरी-
“मतलबी दुनिया से दो चार हुआ करते हैं।
रोज घायल यहाँ ऐतबार हुआ करते हैं।।”
डा. अनुराग पांडेय ”
विख्यात कवि श्री राजवीर सिंह ‘तरंग’ जी ने अपनी ओजस्वी वाणी में संदेश दिया –
“मानव-मानव एक सदा सब, भेद नहीं कुछ आप करो जी।
एक दिए प्रभु प्राण सभी में, माथ नहीं यह पाप धरो जी।।”
देहरादून ,उत्तराखंड से जाने- माने शायर विक्रम सिंह यादव ‘बरनी’ ने अपनी ग़ज़ल सुनायी-
“आग दिखती नहीं हर तरफ धुआँ-धुआँ सा है ।
दर्द सीनों में जाने कितना है हर कोई रूआंसा है।।”
हमीरपुर के सशक्त हस्ताक्षर अवधेश कुमार साहू ‘बेचैन’ ने बसंत पर कविता पढ़कर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया-
“सरसों फूल रही खेतों पर,चना हरा गदराया है।
मटर फली की भीनी खुशबू,मन को भी ललचाया है।।”
अंत में अध्यक्षीय भाषण के पश्चात सुधीर श्रीवास्तव जी ने अपनी रचना पढ़कर सबको वाह वाह करने पर मजबूर कर दिया-
“बेटियां आपके जीवन का विस्तार भी देती हैं,
अपने होने का सिर्फ अहसास कराती हैं,
बेटियां बोझ कहां होती हैं।।”
इसके अतिरिक्त संयोजिका मंजु सक्सेना ‘मंजुल’, सह- संयोजक आलोक शाक्य, अनुप जालान, टीकू राम, पल्लवी भारद्वाज, सुरेंद्र कुमार मौर्य, ओम कुमारी, राजबाला, उपमेंद्र सक्सेना, उमेश त्रिगुणायत आदि श्रोतागण के रूप में मौजूद रह कर कवि/ कवयित्रियों को प्रोत्साहित करते रहे!









