
CRS Hamirpur News- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। यहाँ पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्या महज़ आपका नाम किसी अपराधी से मिलता-जुलता होना, आपको थाने के हवालात और फिर अस्पताल के आईसीयू तक पहुंचा सकता है? हमीरपुर सदर कोतवाली पुलिस के एक कारनामे ने इसे सच साबित कर दिया है। एक पुराने मामले में वारंटी को पकड़ने गई पुलिस ने बिना पुख्ता जांच किए एक बेकसूर हमनाम युवक को उठा लिया और आरोप है कि थाने में उसे थर्ड डिग्री दी गई।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई चूक?
यह पूरी घटना हमीरपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र के मेरापुर इलाके की है। शनिवार, 4 जुलाई, शाम करीब 6 बजे।
कोतवाली पुलिस साल 2018 के मारपीट और गाली-गलौज के एक पुराने मामले में ‘शिवराज’ नाम के एक वारंटी को गिरफ्तार करने गई थी।
पुलिस ने बिना कोई वेरिफिकेशन किए, असली वारंटी की जगह उसी मोहल्ले के रहने वाले एक ‘दूसरे’ शिवराज को उसके घर से जबरन उठा लिया।
पीड़ित परिवार लगातार पुलिस के सामने कहता रहा कि वे गलत इंसान को पकड़ रहे हैं, लेकिन पुलिस ने किसी की एक न सुनी और युवक को थाने ले आई। पुलिस पर थाने लाई युवक के साथ हाथ-पैर बांधकर पीटने का आरोप लगा है। पीड़ित युवक और उसके परिजनों का आरोप है कि थाने के अंदर पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं।
हवालात में बंद करके युवक के हाथ-पैर बांध दिए गए। आरोप है कि हल्का इंचार्ज, एसएचओ, एसआई और सिपाहियों ने मिलकर उसे लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा।
युवक की चीखें सुनकर थाने के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। जब युवक खून से लथपथ हो गया, तब घबराई हुई पुलिस खुद ही उसे लादकर ज़िला अस्पताल ले गई। डॉक्टरों की जांच में युवक के सिर, छाती और हाथ पर मारपीट के गहरे निशान मिले। हालत नाजुक होने के कारण उसे तुरंत कानपुर रेफर कर दिया गया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
पुलिस की अजीबोगरीब सफाई: “गुस्से में खुद को किया घायल”
जब थाने में युवक का वेरिफिकेशन हुआ और पिता का नाम अलग निकला, तब जाकर पुलिस को अपनी गलती का अहसास हुआ। हालांकि, इस भारी चूक और थर्ड डिग्री के आरोपों पर पुलिस अब अजीबोगरीब सफाई पेश कर रही है।
हमीरपुर के अपर एसपी और कोतवाल रामआसरे सरोज का कहना है कि जब युवक को पता चला कि उसे गलत लाया गया है, तो वो खुद ही आक्रोशित हो गया और थाने में हंगामा करने लगा। उसने गुस्से में थाने की खिड़की पर हाथ मार दिया और हाथ-पैर पटकने लगा। पुलिस ने सिर्फ उसे काबू में किया है, उसके साथ कोई मारपीट नहीं हुई।
पुलिस अपने बचाव में यह भी तर्क दे रही है कि पकड़े गए इस गलत युवक के खिलाफ भी पहले से कई मामले दर्ज हैं।
इस घटना से उठते गंभीर सवाल
पुलिस भले ही निष्पक्ष जांच और सीसीटीवी फुटेज खंगालने का दावा कर रही हो, लेकिन इस घटना ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं:
बिना पहचान के गिरफ्तारी: बिना सही पहचान (Verification) किए किसी भी व्यक्ति को उसके घर से जबरन कैसे उठाया जा सकता है?
चोट के निशान: अगर युवक ने खुद खिड़की पर हाथ मारा था, तो उसके सिर, छाती और शरीर पर लाठियों के इतने गहरे निशान कहाँ से आए?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आला अधिकारी दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या सख्त कार्रवाई करते हैं, या फिर पुलिस महकमा अपने ही लोगों को बचाने की कवायद में जुट जाता है।











