US-Iran War: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव चरम पर है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के आदेश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ भीषण सैन्य अभियान छेड़ दिया है। जानें इस महायुद्ध का दुनिया और तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ रहा है।

CRS NEWS दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East Crisis) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक भयंकर युद्ध में तब्दील होता जा रहा है। जॉर्डन में अपने सैनिकों के मारे जाने के बाद अमेरिका पूरी तरह से भड़क गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सीधे निर्देश पर, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ एक बेहद आक्रामक सैन्य अभियान शुरू कर दिया है।
जॉर्डन हमले का इंतकाम: CENTCOM ने IRGC से लिया बदला
अमेरिका के इस भयानक गुस्से की मुख्य वजह जॉर्डन में हुआ वह हमला है, जिसने मार्च के बाद पहली बार अमेरिकी सेना को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव करते हुए दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, एक सैनिक लापता है और चार अन्य घायल हुए थे।
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रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “इन नायकों का बलिदान हमारे संकल्प को और मजबूत करता है।” वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए इसे बर्दाश्त के बाहर बताया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट किया है कि इन हमलों का मकसद सीधे तौर पर ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को ‘तेजी से और कठोर दंड’ देना है।
दक्षिणी ईरान में तबाही, इन शहरों पर बरपे अमेरिकी बम
अमेरिकी जवाबी कार्रवाई से इस वक्त दक्षिणी ईरान दहल रहा है। रणनीतिक रूप से अहम शहर ‘सिरिक’ (Sirik) में जोरदार धमाके सुने गए हैं। इसके अलावा अमेरिकी फाइटर जेट्स के निशाने पर ये प्रमुख इलाके हैं:
- बंदर अब्बास (Bandar Abbas)
- केशम द्वीप (Qeshm Island)
- अवाज़ (Ahvaz)
- बुशहर (Bushehr)
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि इन हमलों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
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ईरान का पलटवार: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी बेस तबाह
दूसरी तरफ, ईरान ने भी हार नहीं मानी है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने अमेरिका पर समझौते तोड़ने का आरोप लगाते हुए ट्रंप के हस्ताक्षर को “बेकार और अमान्य” करार दिया है।
ईरान ने दावा किया है कि उसने रातों-रात जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाज़ा कुवैत को उठाना पड़ा है, जहां एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी पर ईरानी हमले के कारण भयंकर आग लग गई और कई दमकलकर्मी घायल हो गए।
दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर: आसमान छू रहे तेल के दाम
इस महायुद्ध का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी है।
- अब तक 5 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है।
- एक जहाज को निष्क्रिय कर दिया गया है।
- शिपिंग में आई इस रुकावट से कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, जिसके चलते अमेरिका में गैस की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन के करीब पहुंच गई हैं।
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कूटनीतिक हलचल: लेबनानी राष्ट्रपति का अमेरिका दौरा
युद्ध के इन हालातों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। 2009 के बाद पहली बार लेबनान के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति जोसेफ औन (Joseph Aoun) वाशिंगटन पहुंच गए हैं। मंगलवार को उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से अहम वार्ता होनी है। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि लेबनान में इजरायली सैनिकों और हिजबुल्लाह (Hezbollah) के बीच हिंसक झड़पें लगातार जारी हैं।
ग्लोबल ‘हाई अलर्ट’ जारी: क्या होगा आगे?
हालात तेजी से बेकाबू हो रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने यह साफ नहीं किया है कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य अभियान कब तक चलेगा। बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने दुनिया भर में, विशेषकर मध्य पूर्व में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए ‘हाई अलर्ट’ एडवाइजरी जारी कर दी है।
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी हमले नहीं रुके, तो यह संघर्ष सीमाओं को पार कर एक भयानक क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) या तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है।






