
CRS NEWS: अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी के निर्देशन में शुक्रवार को जिले के विभिन्न विकास खंडों में “मनरेगा बचाओ संग्राम” अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तरीय चौपालों का आयोजन किया गया। यह चौपालें डलमऊ, दीनशाह गौरा, जगतपुर, ऊंचाहार, रोहनिया, राही, अमावा, महाराजगंज, बछरांवा, शिवगढ़, हरचंदपुर, खीरो, सतांव, लालगंज, सरेनी सहित अन्य ब्लॉकों में संपन्न हुईं।
चौपालों के माध्यम से ग्रामीण श्रमिकों से संवाद करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रही है। सरकार द्वारा मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने और कानून में बदलाव किए जाने को श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला बताया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह कदम न केवल मजदूर विरोधी है, बल्कि महात्मा गांधी के विचारों और ग्रामीण रोजगार की अवधारणा के खिलाफ भी है।
नेताओं ने आरोप लगाया कि ‘सुधार’ के नाम पर लाए गए नए प्रावधानों से देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना को धीरे-धीरे समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना जैसी आपदा के समय मनरेगा ने करोड़ों गरीब परिवारों को संबल दिया था, लेकिन आज उसी योजना को कमजोर किया जा रहा है। 100 से 125 दिन रोजगार की बात को सिर्फ दिखावा बताते हुए कहा गया कि वास्तव में कई राज्यों में मजदूरों को काम ही नहीं मिल रहा है।
चौपालों में यह भी बताया गया कि पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत रोजगार मात्र 38 दिन रहा है, जो सरकार की असफलता को दर्शाता है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पहले मनरेगा में हर परिवार को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी, न्यूनतम मजदूरी, गांव में ही काम और मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था, जिससे राज्यों को रोजगार देने में कोई बाधा नहीं होती थी।
इसी क्रम में ब्लॉक दीनशाह गौरा के न्याय पंचायत जलालपुर धई अंतर्गत ग्राम पंचायत जलालपुर धई एवं कुरौली बुधकर शेखपुर में आयोजित चौपाल में जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों एवं ब्लॉक कांग्रेस नेताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्लॉक अध्यक्ष अनुरुद्ध दीक्षित ने की। चौपाल में बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर उपस्थित रहे।
इस दौरान जिला उपाध्यक्ष (संगठन प्रभारी) द्वारा एसआईआर से संबंधित ओएसडी सूची भी प्रस्तुत की गई, जिस पर विस्तार से चर्चा की गई। कांग्रेस नेताओं ने संकल्प लिया कि मनरेगा और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए यह संघर्ष लगातार जारी रहेगा।










