वर्चस्व की लड़ाई बना सार्वजनिक रास्ते का विवाद, स्थानीय न्यायालय से पहुंचा सुप्रीम कोर्ट।
शाहजहांपुर-सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जा करके शौचालय निर्माण विवाद स्थानीय न्यायालय से अब उच्चतम न्यायालय पहुंच गया। सड़क नवीनीकरण में, रास्ते में बने खड़े दो शौचालय आड़े आ रहे में से एक को तोड़ दिया गया जबकि दूसरा दबंगई में खड़ा विकास कार्यों का मुंह चिढ़ा रहा है। निर्माण से अधूरी पड़ी सड़क, पर आमजन का निकलना दुश्वार है।
मामला, तहसील तिलहर ब्लाक के डढ़िया गांव का है।
जहां दो पक्षों का आमने-सामने मकान है और दोनों नहीं सड़क के रास्ते में अपने-अपने शौचालय बना रखे थे। सड़क का निर्माण कराए जाने पर जहां एक पक्ष गुरुदयाल का शौचालय तोड़ दिया गया तो वहीं दूसरा पक्ष ओमप्रकाश शौचालय तोड़ने पर भारी एतराज जताता रहा। एक जरा सी जगह के कारण न्यायालय पहुंची है लड़ाई, वर्चस्व की लड़ाई में बदल गई।
इस मामले में गुरु दयाल पक्ष ने सार्वजनिक रोड से अवैध कब्जा हटाए जाने के लिए उपजिलाअधिकारी के यहां शिकायत कर बाद दाखिल किया। निवृतमान उप जिलाधिकारी द्वारा तमाम जांच करने के बाद सड़क रास्ते से अवैध कब्जा हटाने की आदेश जारी कर दिए, जिसे दूसरे पक्ष ओमप्रकाश ने स्थानीय SDM के आदेश को चैलेंज करते हुए जिला न्यायालय की शरण ली परंतु उसे वहां भी हार का सामना करना पड़ा।
सार्वजनिक रास्ते पर अवैध रूप से कब्जा किए जाने और जिला न्यायालय से मुकदमा हारने के बाद द्वितीय पक्ष में उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जिला न्यायालय के आदेश को चैलेंज किया परंतु लंबे अंतराल के बाद उसे उच्च न्यायालय से भी हर का मुंह देखना पड़ा। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालय एवं स्थानीय न्यायालय का आदेश बरकरार रखते हुए सार्वजनिक रास्ते पर शौचालय के रूप में अवैध कब्ज़ा हटाए जाने के लिए स्थानीय प्रशासन को निर्देशित किया परंतु स्थानीय प्रशासन, जिला न्यायालय के आदेश सहित उच्चतम न्यायालय के आदेशों की आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए सार्वजनिक रास्ते को अवैध कब्जा मुक्त नहीं कर सका और सड़क निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है।
मौके पर पहुंची सीआरएस न्यूज़ की टीम को विपक्षी ने उक्त शौचालय को अपने बग्घर की जगह बताते हुए मामले में सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ मांगने के लिए गुहार लगाने की बात बताई और अपने मोबाइल में दायर की गई पिटीशन का नंबर दिखाया लेकिन जो की पूरी तरह समझ से बाहर है। सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब कब्जे का यह मामला लगभग 2 साल से चल रहा है जिसे स्थानीय स्तर पर यूपी जिला अधिकारी द्वारा दोनों पक्षों को आपस में बिठाकर शांतिपूर्वक सुलझाया जा सकता था और आमजन के लिए सड़क का निर्माण हो चुका होता लेकिन उन्होंने इस मामले में राती पर दिलचस्पी नहीं ली जिसके कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामला न्यायालय में होने के कारण सड़क निर्माण भी अधूरा पड़ा है और वहां कीचड़ एवं गंदगी की वजह से आवागमन में आमजन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।











