अटल ऑडिटोरियम में “कर्मयोग” मद्य निषेध एवं विकसित भारत की संगोष्ठी आयोजित।
CRS शाहजहांपुर। “कर्मयोग” मद्य निषेध एवं विकसित भारत की, संगोष्ठी मुख्य अतिथि श्री एल० वेंकटेश्वर लू, अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण एवं सैनिक कल्याण विभाग, उ०प्र० शासन तथा महानिदेशक-उपाम व एसआईआरडी की उपस्थिति में अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, प्रबुद्धजनों एवं अन्य स्टेक होल्डर्स के साथ संगोष्ठी आयोजित की गई।
इस मौके पर मुख्य अतिथि ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। कहा कि भारत को वर्ष 2047 तक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाया जाना, माननीय प्रधान मंत्री का सपना है जिसमें हम सभी को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति नशे की ओर जाएगा, वह बाद में अवश्य पछताएगा। इसलिए सही मार्ग पर चलना और सही बातों को समझना आवश्यक है, जिसके लिए मन और बुद्धि के स्तर पर संवाद करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि भारत ऋषियों और मुनियों की पावन धरती है। जितनी तपस्या भारत में हुई है, उतनी विश्व में कहीं नहीं हुई। मन को वश में रखने और अच्छे कार्य करने के लिए श्रीमद्भागवत गीता सर्वश्रेष्ठ शास्त्र है। सभी महापुरुषों ने अपने जीवन में अध्यात्म को प्राथमिकता दी है। विकसित भारत के निर्माण के लिए लोगों को अच्छे कार्यों हेतु मंथन और चिंतन करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आहार, निद्रा और भोग व्यक्ति को भय प्रदान करते हैं। जब व्यक्ति को ज्ञान नहीं होता, तो उसके जीवन में दुख उत्पन्न होता है। लोगों को सही बातों के प्रति जागरूक होकर अपनी चेतना का विकास करना चाहिए। सही विचारों से आत्मविश्वास बढ़ता है और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होते हैं। गलत तरीके से दिखावा करने पर पुण्य घटता है। समाज को अच्छा बनाने के लिए प्राथमिकताओं पर ध्यान देना होगा तथा लोगों को अच्छी शिक्षा की ओर अग्रसर करना होगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत बनाने के लिए प्रत्येक विषय पर गहराई से मंथन करना आवश्यक है। मोबाइल के नशे से बच्चे बर्बाद हो रहे हैं तथा इसके कारण बच्चों में नींद न आने की समस्या उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि सत्य ज्ञान देने वाला भगवान से भी बड़ा होता है। श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन करने से आंतरिक चेतना में सुधार होता है। व्यक्ति को देश और समाज के सम्मान के लिए जीना चाहिए। अपराध के मार्ग पर चलने वालों की आत्मा दुखी होती है।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों की बातों में सच्चाई निहित होती है और दूसरों के साथ छल-कपट नहीं करना चाहिए। कर्मयोग की मूल बातों को समझने की आवश्यकता है। धर्म की सच्चाई के साथ चलें तथा लोगों की सेवा ईमानदारी और निष्ठा भाव से करें। मानव शरीर बड़ी भाग्य से प्राप्त हुआ है, अतः इसे अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए।
उन्होंने सभी प्रकार के नशों से मुक्त होकर आध्यात्मिकता की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया। पूरे मनोयोग से विकसित भारत के निर्माण में सहयोग करें। सकारात्मक सोच के साथ माननीय प्रधानमंत्री जी के 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करें। सभी लोगों को मिलकर भारत को महान बनाना है। भारत को विकसित करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने-अपने क्षेत्र में पूरी मेहनत और ईमानदारी से कार्य करना होगा।

उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षा और योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। व्यक्तियों के अंदर सेवा भाव होना आवश्यक है तथा अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करना चाहिए। लोग विभिन्न प्रकार के नशों से दूर रहें। भारत ऋषि-मुनियों का देश है, इसे पुनः विश्वगुरु बनाना है। सकारात्मक विचारों, मेहनत और लगन के साथ प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करना होगा।
उन्होंने कहा कि नशा नाश का कारण है, चाहे वह किसी भी प्रकार का हो। नशे की अवस्था में व्यक्ति संयम और मर्यादा को भूल जाता है। कर्म के माध्यम से आत्मा का परमात्मा से संबंध जुड़ता है। नशा मुक्ति और अच्छे कार्यों के लिए लोगों को प्रेरित और प्रोत्साहित करना आवश्यक है।
जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगोष्ठी में बताई गई बातें अपने कार्यालय एवं घरों में बताएं। उन्होंने कहा कि बताई गई बातों का फैलाने कार्य करें। बताई गई बातों को जीवन में अपनाएं और 2047 में विकसित भारत बनाने में योगदान करें। कार्यक्रम का संचालन इंदु अजनबी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर, डिप्टी डायरेक्टर अजय वीर सिंह यादव, क्षेत्रीय मद्य निषेध अधिकारी आरएल राजवंशी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार, परियोजना निदेशक अवधेशराम, जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार शर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक हरिवंश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दिव्या गुप्ता सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।









