जब 13 कर्मी हटा दिए गए तो फिर इन 13 कर्मचारियों से बिना किसी अपॉइंटमेंट के MRF सेंटर पर काम कराया ही क्यूं जा रहा है।

शाहजहांपुर/तिलहर। चेयरमैन को निशाना बनाते हुए तमाम फजीहते खड़ी करते हुए पहले 13 कर्मचारियों को बाहर निकालवा दिया जाता और फिर कई माह बीतने0 के बाद MRF सेंटर पर बाबर्दी 13 व्यक्तियों से पालिका के सफाई अनुभाद द्वारा काम कराया जाता लेकिन जब उन्हें वेतन दिए जाने का समय आता तो उन 13 कर्मचारियों का मामला चेयरमैंन को बदनाम करने की नियत से उनके सर डालने में रत्तीभर की हिचक नहीं रखी।
जहां एक ओर चेयरमैन की रिकमंड पर एक भी व्यक्ति को ठेका पद्धति पर भी नहीं लगाया जा सका अब तक तो फिर उक्त 13 लोग, पालिका प्रशासन में किसकी कलम के अधीनस्त कर दिए गए, यह बड़ा सवाल है। महिला सम्मान की बात करने वालो में आखिर किसके इशारे पर एक महिला चेयरपर्सन को लगातार बदनाम करने की साजिश चल रही है, इससे आज नहीं तो कल आखिर पर्दा तो उठना ही है परंतु उससे पहले यह की ठेका पद्धति पे काम कर रहे कर्मचारियों को समय से वेतन न दिए जाने से उनका लगातार शोषण चल रहा है जिसके एवज आज चेयरमैन को भी उनके पक्ष में उतरना पड़ा।
सूत्र बताते है कि उक्त 13 ठेका कर्मचारियों को इस लिए हटाया गया था कि वे पेपरों में ड्यूटी करते परन्तु हकीकत में वे अपने घर बैठ कर पालिका के सरकारी ख़ाज़ाने से ठेकेदार द्वारा आसानी वे वेतन पा लेते। यह गलत था माना गया परंतु फिर बिना रिकमंड या लिखा पढ़ी के, पालिका अध्यक्ष के संज्ञान बिना, विगत दो माह से यह 13 लोग MRF सेंटर पर कार्य कर रहे है तो अब इनके वेतन किस प्रकार से पास किया जाएगा, यह भी बड़ा प्रश्न है।
सूत्रों की माने तो, कमाल यह तो है ही लेकिन इससे बड़े कमाल जग जाहिर होते है कि समाचार पत्रों के अनुसार नगर में विकास कार्यों के लगातार होते ठेकों के बाद नगर में जहां जरूरत होती वहां कसम होता है यह फिर एक के अपने चिन्हित स्थानों पर और कितना काम और कितना पैसा, यह समझना मुश्किल होता। यही नहीं वेतन पालिका से निकाला जाता और कर्मी से काम ठेकेदारों के घरों पर करवाया जाता, यह भी बड़ा प्रश्न है परंतु आखिर हम योगी जी ईमानदार सरकार में है इस लिए कोई प्रश्न ही नहीं जो कुछ गलत हो और जो गलत दिख रहा है यह सिर्फ एक वहम है।
इस लेख में किसी पर आरोप नहीं परंतु इतना तो जरूर है कि यदि कर्मचारियों को विधिवत निकाल दिया गया था तो फिर दुबारा उन्हें रखने में विधि का प्रयोग क्यूं नहीं किया गया..? इस मामले में चेयरमैन को भरोसे में क्यूं नहीं लिया गया..?
सवाल यह उठता है कि सरकारी संस्थान (नगर पालिका परिषद) में भीड़ अचानक घुस कर स्वयं काम करने लगे तो उसका वेतन कौन और क्यों निकालेगा और यदि आज MRF सेंटर पर इन्हें जबरन घुस कर काम करना बताया जा रहा है तो फिर कल कोई भी दो चार ग्रुप में पालिका में खुद से घुस कर स्वयं भू कर्मचारी घोषित कर लेगा तब क्या होगा..? ऐसे बहुत से सवाल है जिनका जवाब किसी के पास नहीं।










