
CRS NEWS AGENCY:- एक हालिया रिपोर्ट ने ग़ज़ा में इजरायली सेना के बढ़ते सैन्य नियंत्रण और आम नागरिकों पर पड़ रहे इसके विनाशकारी प्रभावों को उजागर किया है। युद्धविराम समझौते के नियमों के विपरीत, इजरायल ने अपनी सैन्य सीमा तय करने वाले पीले कंक्रीट ब्लॉकों, जिन्हें ‘येलो लाइन’ कहा जाता है, को ग़ज़ा के अंदरूनी हिस्सों की तरफ खिसका दिया है। इस अतिक्रमण के कारण इजरायली सेना का नियंत्रण अब ग़ज़ा के 60% से अधिक भूभाग पर हो चुका है, और इसे 70% तक बढ़ाने की योजना है।
इस बढ़ते सैन्य घेरे ने ग़ज़ा के निवासियों के लिए सुरक्षित ठिकानों को लगभग खत्म कर दिया है। तामेर अबू असी जैसे हजारों विस्थापित लोग, जो पहले ही अपनों को खो चुके हैं, बार-बार अपना आशियाना बदलने को मजबूर हैं। सीमाई इलाकों में रहने वाले नागरिकों का दैनिक जीवन बुलडोजर, ड्रोन हमलों और टैंकों की निरंतर मौजूदगी के कारण अत्यधिक खौफनाक बन चुका है।
निष्कर्षतः, जैसे-जैसे यह ‘येलो लाइन’ ग़ज़ा के भीतर आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे करीब 20 लाख फिलिस्तीनियों के लिए सुरक्षित आश्रय ढूँढना और बुनियादी जीवन जीना एक असंभव चुनौती बनता जा रहा है। बुनियादी मानवीय अधिकारों के हनन के बीच यहाँ की जनता लगातार मौत और अनिश्चितता के साये में जीने को मजबूर है।











