
CRS NEWS AGENCY:- मई 2023 में मैतेई (Meitei) और कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा को तीन साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पूर्वोत्तर का यह खूबसूरत राज्य आज भी पूरी तरह शांत नहीं हो पाया है। साल 2026 में भी मणिपुर की स्थिति बेहद नाजुक और संवेदनशील बनी हुई है, जहाँ रुक-रुक कर होने वाली हिंसक घटनाएँ ज़मीनी स्तर पर गहरे अविश्वास को दर्शाती हैं।
हालिया घटनाक्रम और सुलगता तनाव
हाल के महीनों में मणिपुर में नए सिरे से तनाव देखा गया है। हाल ही में इंफाल वेस्ट जिले के कांतो सबल इलाके में मैतेई समुदाय के कुछ खाली पड़े घरों में आग लगाने की घटना सामने आई, जिसके बाद स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इससे पहले अप्रैल 2026 में बिश्नुपुर जिले में एक बम विस्फोट में दो बच्चों की जान चली गई थी, जिसके बाद घाटी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और इंटरनेट निलंबन जैसी कड़े कदम उठाने पड़े।
इसके अतिरिक्त, राज्य में सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए जाने वाले हमले भी जारी हैं, जिसमें असम राइफल्स के जवानों की शहादत और उग्रवादी गुटों की सक्रियता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
संघर्ष के बदलते आयाम: अब नागा समुदाय भी लपेटे में?
मई 2023 में शुरू हुआ यह संघर्ष मुख्य रूप से घाटी में रहने वाले मैतेई और पहाड़ियों में रहने वाले कुकी-जो समुदायों के बीच था। लेकिन 2026 में इस संघर्ष का दायरा बढ़ता दिख रहा है। हाल ही में नागा और कुकी समुदायों के बीच भी झड़पों और अपहरण की खबरों ने राज्य प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि यह तनाव नागा समुदाय तक बड़े पैमाने पर फैलता है, तो पूरे राज्य को एक नए और अधिक विनाशकारी त्रिकोणीय संघर्ष (Triangular Conflict) का सामना करना पड़ सकता।
मणिपुर के नागरिक केवल सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता से ही नहीं जूझ रहे हैं, बल्कि इस साल प्रकृति की मार ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कम मानसूनी बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और आवश्यक वस्तुओं की कमी का संकट भी गहरा रहा है।
मणिपुर आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ केवल भारी सुरक्षा बलों की तैनाती या इंटरनेट बंद करने जैसे फौरी कदमों से शांति नहीं लाई जा सकती। राज्य को इस अंतहीन हिंसा के चक्र से निकालने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए दोनों समुदायों के बीच खोए हुए विश्वास को बहाल करना होगा। मणिपुर के लोगों को हथियारों के साये से निकालकर मुख्यधारा के विकास, रोजगार और सुरक्षित भविष्य की गारंटी देना ही इस संकट का एकमात्र समाधान है।











