विकास के नाम पर लाखों वृक्षों का कत्लेआम पर्यावरण के लिए घातक: प्रदीप वैरागी
CRS पुवायां/शाहजहांपुर-जल जंगल और जमीन को बचाने की कवायद में लगे पर्यावरण प्रेमी प्रदीप वैरागी ने कहा कि, आज पर्यावरण दिवस है, यानी पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण दिन! कुछ लोग सोशल मीडिया पर पेड़ लगाते हुए तो कुछ पर्यावरण के साथ फ़ोटो खिंचवाते हुए पर्यावरण दिवस की बधाई देते हुए खूब नज़र आए! जिसमें बहुत से बुद्धिजीवी वर्ग, राजनीतिक वर्ग, समाजसेवी वर्ग और उद्योगपति वर्ग भी शामिल रहे! बहुत से कार्यक्रम और सेमिनार का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़े-बड़े पर्यावरण के ऊपर व्याख्यान भी दिए गए! इसके फायदे, नुकसान भी बताए गए, लेकिन क्या हुआ इसके बाद, वही जो दशकों से होता हुआ आ रहा है!
शाहजहाँपुर से पलिया तक विकास और हाइवे निर्माण, सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लाखों वृक्ष काट दिए गए जबकि नियम यह होना चाहिए, जितने भी पेड़ काटे जाएं उससे दोगुने पेड़ पहले तैयार किए जाएं! विडंबना यह है कि वृक्षारोपण अभियान चलाने वाले लोग पौधरोपण तो करते हैं लेकिन उनके संरक्षण के लिए बिल्कुल सजग नहीं रहते हैं! आज यदि देखा जाए तो विकास के नाम पर अकेले जनपद शाहजहांपुर में करोड़ों वृक्षों को कत्लेआम कर दिया गया! जबकि इन वृक्षों को दूसरी जगह पर नवीनतम तकनीक का सहारा लेकर विस्थापित भी किया जा सकता था! और यदि इनका कटान आवश्यक कठिन था तो इससे पूर्व नए वृक्ष तैयार किए जाते हैं तब जाकर पर्यावरण संतुलन का सपना साकार हो सकता था! सभी अगले साल के लिए भूल जाएंगे कि पर्यावरण भी कोई चीज़ है, जो पेड़ लगाए होंगे, उनमें से अधिकतर ध्यान न देने की वजह से सूख जाएंगे और वही पूंजीवाद का नया नाच फिर से चालू हो जाएगा! जंगलों को काटने का विकास के नाम पर बड़ी-बड़ी इमारतें, बड़े-बड़े पुल, बड़े–बड़ी इमारतें, बड़े-बड़े पुल, बड़े-बड़े कारख़ाने बनाने का खतरनाक से खतरनाक कीटनाशक फ़र्टिलाइज़र का प्रयोग बढ़ाया जाएगा,प्लास्टिक का उपयोग बढ़ाया जाएगा! यह जानते हुए कि इससे मानवता को कितना बड़ा ख़तरा है! आने वाली नस्लों के लिए कितना बड़ा नुक़सान है! मेरे हिसाब से पर्यावरण को जितना नुक़सान पहुंचाया जाएगा! बीमारी भी उतनी तेजी से बढ़ेगी! और बढ़ेगी तभी तो बड़े-बड़े पूंजीपतियों की तिजोरी भी गर्म होगी, क्योंकि इलाज तो उन्हीं के पास है!









