
नीट यूजी के घोषित परिणाम में 695 अंक हासिल कर ऊंचाहार के बेटे सरमद बने टॉपर
मों ज़ुबैर खांन
ऊंचाहार, रायबरेली। बीते पांच मई को हुई नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ( NEET ) यूजी 2024 की परीक्षा का परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिया गया है। इस साल एमबीबीएस, बीएचएमएस, बीडीएस समेत अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने के इच्छुक अभ्यर्थियों ने नीट यूजी परीक्षा में प्रतिभाग किया था। इनमें से ऊंचाहार के होनहार अभ्यर्थी सरमद अली ने कुल 720 अंक में से 695 अंक हासिल करके ऑल इण्डिया रैंक में 3356 वाँ स्थान अपने नाम दर्ज कराया है। सरमद के परीक्षा परिणाम को लेकर परिवार के लोगों को बेसब्री से इंतिजार था। परिणाम घोषित होने के बाद परिवार, रिश्तेदार समेत मोहल्ले के लोग और ईष्ट मित्र में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। सभी ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इज़हार किया।
ऊंचाहार कस्बे के मोहल्ला मास्टरगंज निवासी सरमद अली नीट की तैयारी के लिए पहले राजस्थान के कोटा में कोचिंग किया उसके बाद कानपुर में रहकर कोचिंग किया। उनके पिता नियामत अली मुम्बई शहर में रहकर अपना व्यवसाये करते हैं। यहां वह अपनी मां रिजवाना बानों और उन्हे संबल देने वाले चाचा हाजी मोहम्मद इलियास उर्फ पप्पू कुरैशी के साथ रहते हैं। मां रिजवाना बानों ग्रहणी हैं और चाचा अपना खुद का व्यवसाय करते हैं। सरमद दो भाई बहन में दूसरे नम्बर पर हैं। बड़ी बहन विवाहित हैं। मजहबी तालीम उन्होंने पास के मदरसे से हासिल की है। प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्होंने एनटीपीसी आवासीय परिसर स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में दाखिला ले लिया। यहां इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कई वर्षों से नीट के लिए कोचिंग कर रहे सरमद ने कई बार नीट की परीक्षा में अपना लोहा मनवाया है। वह बीएएमएस व बीडीएस के लिए योग्य घोषित किए गए लेकिन उनका जुनून एमबीबीएस डॉक्टर बनने का था। इसलिए बीएएमएस और बीडीएस के लिए उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। फिर अगले प्रयास में सफल होने के लिए उन्होनें पढ़ाई शुरू कर दिया। अगले प्रयास से पहले लगातार सरमद का स्वास्थ ठीक नहीं था। फिर भी पढ़ाई चालू रखी और नीट परीक्षा में बैठे इस बार कम अंक आने पर पिता नियामत अली ने थोड़ी नाराजगी जताई जिससे उन्हें थोड़ी निराशा हुई। हर मुश्किल में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने वाले और उन्हे समय समय पर संबल देने वाले उनके चाचा हाजी पप्पू कुरैशी ने भाई नियामत अली की नाराज़गी का सामना करके सरमद के हौसले को उड़ान देने के लिए पंख दिया। सरमद बताते हैं की उनके चाचा के ऐसा करने से उनके अन्दर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ और अगले प्रयास में वह दोहरी ऊर्जा के साथ परीक्षा में बैठे। पेपर अच्छा गया और उन्होंने वह कर दिखाया जिसका सभी को इंतिजार था। नीट परीक्षा में कुल 720 में से 695 अंक अर्जित किए और सफलता की ओर अग्रसर हो गए। इतने अंक काउंसलिंग के लिए पर्याप्त होते हैं।
ग्रेजुएट पिता के अधूरे सपने को पूरा किया,
सरमद के पिता नियामत अली ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। इनके पिता नियामत अली भी बीयूएमएस की पढ़ाई कर रहे थे। लेकिन इसी बीच घर के बड़े बेटे होने के चलते उनके कंधे पर परिवार की ज़िम्मेदारी बढ़ गई इसलिए वह दुबई चले गए। पिता का डॉक्टर बनने सपना वहीं अधर में लटका रहा। साल बीते वक्त बदले और हालात बदले। बेटे सरमद की डॉक्टर बनने की लगन देख उन्हें अपने अधूरे सपने को साकार होता दिखाई देने लगा। पिता ने नीट की तैयारी कारवाई और कई बार उतार चढ़ाव के बाद आखिरकार बेटे सरमद ने खुद को एमबीबीएस के लिए तैयार करके पिता के सपने को साकार कर दिखाया।
मरीजों को ठीक से स्वास्थ व्यवस्था न मिलते देख बचपन से था डॉक्टर बनने का सपना।
सरमद बताते हैं कि आसपास के लोगों को मैं देखता था वह ईलाज के लिए सरकारी और निजी अस्पतालों में जाते थे। कभी भीड़ भाड़ तो कभी संसाधन अभाव तो कभी कई तरह जरूरतों की कमी होने के चलते मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं मिल पाती थी। यह सब देख कर बचपन से एक कुशल डॉक्टर बनने का सपना था। उन्होंने कहा क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ सेवाएं प्रदान करना ही मेरे डॉक्टर बनने का असल उद्देश्य है।
दस से बारह घण्टे होती थी पढ़ाई।
सरमद बताते हैं कि वह प्रतिदिन सुबह पांच उठकर पहले फजर की नमाज़ पढ़ने जाते थे। इसके बाद पढ़ाई करते थे। वह प्रतिदिन दस से बारह घण्टे पढ़ाई किया करते थे। फ्रेस्टेशन दूर करने के लिए वह पार्क में टहलने जाते थे।
चाचा हाजी पप्पू कुरैशी के बिना आसान नहीं था नीट क्वालीफाई करना।
परीक्षा में सफलता हासिल करने से पहले कई बार उतार चढ़ाव और पिता की डांट से मन उदास होने पर सरमद बताते हैं कि उनके चाचा हाजी पप्पू कुरैशी ही उन्हें सम्बल देते हैं उनके सानिध्य में ही उन्हे सफलता मिली है। हर तरह से चाचा उनके साथ खड़े रहे। जब भी जरूरत पड़ी चाचा हमेशा साथ खड़े मिले। सरमद कहते हैं यह सफलता का श्रेय पहले चाचा हाजी पप्पू कुरैशी को जाता है उसके बाद पिता नियामत अली और मां रिजवाना बानो को।
नीट क्वालीफाई करके ऊंचाहार के पहले एमबीबीएस डॉक्टर होंगे सरमद
ऊंचाहार कस्बे से अबतक किसी डॉक्टर ने नीट क्वालीफाई नहीं किया। नीट क्वालीफाई करके सरमद पहले एमबीबीएस डॉक्टर होंगे।
मंगलवार को उनका परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। रिश्तेदार, मोहल्ले के लोगों समेत सभी ईष्ट मित्र घर पहुंचे मिठाई खिलाकर बधाई और शुभकामनाएं दी। सभी गौरवावन्वित महसूस कर रहे हैं। सरमद के नीट पास करने पर पूरे कस्बे में खुशी की लहर है।










