
जजों ने नशे के अंतरराष्ट्रीय से लेकर भारतीय कानून के बारे में विस्तार से बताया
ऊंचाहार, रायबरेली। नशा मुक्ति उन्मूलन को लेकर न सिर्फ सरकार अपितु राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भी चिंतित है। इनके निर्देशन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नशा मुक्ति धूम्रपान , मद्यपान आदि को लेकर नशा उन्मूलन व साक्षरता जगरूता शिविर का आयोजन किया गया। विद्यालय के छात्र छात्राओं को नशे से होने वाले दुष्परिणाम और उनसे खुद कैसे व परिवार के लोगों के साथ दोस्तों को कैसे बचाया जाए आदि बताया गया। अपर जिला जज ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की है। कार्यक्रम में न सिर्फ अपर जिला जज अपितु सहायक व जूनियर डिवीजन जज ने भी शिरकत की हैं। उन्होनें छात्र व छात्राओं को नशे पर विस्तृत जानकारी दी है।
क्षेत्र के मदारीगंज गांव के निकट स्थित शिव मंगल मौर्य इन्टर कॉलेज में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बुधवार को नशे के विरुद्ध एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें अपर जिला जज अनुपम शौर्य और सहायक व डिवीजन जजों ने शिरकत की है। विद्यालय के प्रबंधक डॉक्टर आरपी मौर्य की मौजूदगी में बुद्ध प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरूवात हुई। अपर जिला जज जिला व विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अनुपम शौर्य ने बताया कि नशा से क्या दुष्परिणाम होते हैं। नशेड़ी की पहचान कैसे होती है। उन्होंने पंचशील के बारे में संस्कृत में पंक्तियां पढ़ीं और फिर हिन्दी में अनुवाद कर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने मौजूद छात्र छात्राओं को खुद नशे से दूर रहने के साथ अपने परिवार और ईष्ट मित्रों को भी दूर रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि नशा हमारे जीवन में किस तरह नाश करता है। साथ आए सहायक सिविल जज पारितोष ने बताया कि नशे में रहने वाले व्यक्ति की पहचान कैसे होती है और उनमें होने वाले लक्षण के बारे में बताया और नशे के दुष्परिणाम के बारे में भू बताया। सिविल जज जूनियर डिवीजन नीलांचल चौधरी ने आठ तरीके के नशीली औषधियों के बारे में बताया। नशीले पदार्थ सूंघने से लेकर खाने पीने के फार्म में बाजारों में उपलब्ध हैं उनके सेवन से वह जीवन में कितने भीषण प्रभाव डालते हैं। नशे से शरीर और मस्तिष्क पर कितना गहरा असर है इसकी विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में आए जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि परिवार में यदि एक व्यक्ति नशे का लती हो जाती है तो इसका दंश पूरा परिवार झेलता है। 35 प्रतिशत भारतीय नशे के लती हैं। जिनमें 20 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने नशे के कानून बताया जो जिसमें सार्वजनिक स्थान स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, आदि जगहों पर नशा नहीं करने के बारे में बताना शामिल है। इसी तरह सहायक सिविल जज जूनियर डिवीजन हर्षिता सिंह, समृद्धि मिश्रा ने नशे से होने वाले दुष्परिणाम और नशा हमारे जीवन के साथ परिवार पर क्या गलत असर डालता है बताया। इसके साथ ही नशे पर बने अंतराष्ट्रीय कानून समेत राष्ट्रीय कानून एनडीपीएस और एनसीबी के बारे में बताया। अन्त में अपर जिला जज ने वहां मौजूद छात्र छात्राओं को नशे से बचने और बचाने की शपथ दिलाई। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लोक अदालत कनिष्ठ लिपिक वेदप्रकाश यादव, डाटा एंट्री ऑपरेटर जमुना प्रसाद, विद्यालय की प्रधानाचार्य मीरा मौर्य के समस्त अध्यापक व अन्य विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य समेत अध्यापक मौजूद रहे।










