
CRS NEWS : लखनऊ। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की एक गोपनीय बैठक में समाजवादी पार्टी (सपा) के वोट कटवाने की रणनीति बनाई गई। उन्होंने दावा किया कि इस बैठक की जानकारी एक नेता ने सार्वजनिक रूप से दी और कन्नौज के एक विधायक ने भी वोट कटवाने को लेकर बयान दिया था।
पत्रकार वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि मंगलवार को सपा के सभी विधायक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग और मतदाता सूची में पाई गई विसंगतियों को लेकर निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपेंगे। इसके बाद इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया जाएगा।
उन्होंने मांग की कि फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया केवल सरकारी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) द्वारा ही की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किस विधानसभा क्षेत्र और किस बूथ पर किसके नाम से फॉर्म-7 जमा किए गए हैं। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उपलब्ध आंकड़े यह दर्शाते हैं कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग के वोट काटे जा रहे हैं।
सपा प्रमुख ने उदाहरण देते हुए कहा कि विधूना में सपा के नगर अध्यक्ष के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर वोट कटवाने के लिए फॉर्म भरा गया। उन्होंने यह भी कहा कि कन्नौज में जिलाधिकारी से शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप लगाया गया कि तार्किक विसंगतियों के नाम पर भी वोट हटाए जा रहे हैं। अयोध्या में छह बच्चे होने का हवाला देकर वोट काटे जाने का भी मामला सामने आया है।अखिलेश यादव के अनुसार, अब तक प्रदेश में सपा द्वारा 47, भाजपा द्वारा 1728 और अज्ञात नामों से 1,28,659 फॉर्म-7 भरे गए हैं। उन्होंने दावा किया कि अज्ञात नामों से भरे गए फॉर्म भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा डाले गए हैं। इस दौरान उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी और योगी आदित्यनाथ के फॉर्म-7 से जुड़े बयानों के वीडियो भी दिखाए।
उन्होंने कहा कि यदि एक भी जिलाधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है, तो पूरा एसआईआर सही तरीके से लागू हो सकता है। सपा ने इस मुद्दे पर कई बार निर्वाचन आयोग से शिकायत की है।
इस मौके पर कांग्रेस के पूर्व विधायक केके शर्मा ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। पत्रकार वार्ता के दौरान सपा प्रमुख ने “दबदबा” शीर्षक से एक वीडियो गीत भी दिखाया और स्पष्ट किया कि इसे पार्टी द्वारा तैयार नहीं किया गया है। गीत में हथियारों के साथ दृश्य दिखाए गए हैं, ताकि बाद में इसे लेकर कोई भ्रम न रहे।








