गौरक्षा के नाम पर सरकार ने खर्च कर दिया करोड़ो रुपए का बजट!
फिर भी सड़को पर भूख प्यास से तड़पती हुई आबारा घूमने को मजबूर!
CRS इमरान सागर की क़लम से!
शाहजहाँपुर-गौशाला में पकड़ कर जमा किए गए गाौवंश के साथ प्रेम प्रदर्शित कर, पालक, बनते हुए वहाँ से निकलवा कर, घर ले आना और रात के अन्धेरे में घर के अन्दर रख कर सुबह सूूरज निकलने से पूर्व उसका दूध, दूह कर, फिर उसे देर शाम तक आबारा छोड़ देना! कुछ इसी परम्परा पर गौरक्षा ढ़ोल बजता दिखाई पढ़ता है! इस परम्परा को डर और खौफ का नाम दिया जा सकता है क्यूंकि यदि पालक बन कर लाया तो फिर दिन में उसे घर से बाहर निकाला ही क्यूँ यह सोचनीय है!
किसकी मजाल है अब, गाय माता को जो सड़क से लाकर घर में रख कर उसकी सेवा कर सके! गौवश की सुरक्षा के नाम पर, फर्श से अर्श तक का सफर अनेक तथाकथित संगठनो के व्यक्तित्वो ने राजसी ठाठ बाट बना लिए और अब, वे झूठे वादो के साथ एयरकंडीशंस कारो, और राजनीति के बड़े गलियारो में पार्टियों में आक्रषण का केन्द्र बन रहे हैं!
जागरुकता से पूर्व लगातार मुकदमे ने आमजन में गौवंश के बिरुध इतना डर पैदा कर दिया कि अब तो प्यास से तड़पती राह चलती गाय को पानी पिलाना भी अपराध सा लगने लगा है! यदा कदा अभी देखने को मिलता है कि नगर की सड़को पर, किसानो की फसलो पर, गलियों में दरबाजो पर भूख से बेकल आबारगी करते गौवश को चन्द तथाकथित जिन्होने गौवश को पेटेंट करा रखा है, वही खिलाते और पिलाते नज़र आ जाते हैं! और इस छोटी सी मानवता रूपी क्रिया करने में भी अपनी सेल्फी सोशलमीडिया पर वायरल करने से नही चूकते!
कितने बेरुखे और बदजात से हो गए हैं हम इस कलयुग में कि हमारी माताएं राष्ट्रीय राजमार्गो, ग्रामीण क्षेत्र में किसानो फसलो और नगर की सड़को सहित मोहल्लो की गलियों में, अपने आशियानो के बाहर आबारा और बेसहारा सी भूख से तड़पत रही हैं और हम AC कमरो, और हालो में गौरक्षक के रूप में आक्रषण का केन्द्र बने खामोशी से सब देख कर भी नज़र अन्दाज़ किए हुए हैं! यह कहना गलत नही होगा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने गौ सरंक्षण के नाम पर गौशालाओं के निर्माण के करोड़ो रुपया अनुदान दिया है लेकिन इसके पीछे का सच़यह नही कि आखिर उस पैसे से यदि गौशालाओं का निर्माण हुआ भी तो कहाँ और फिर इतने बड़े पैमाने पर आज भी गौवंश भूख से प्यास से तड़पता आबारा क्यूँ घूमता नज़र आता है यह सोचनीय प्रश्न हो सकता है परन्तु इस पर मथंन कर एक बार फिर बड़े पैमाने पर आमतौर पर आ जन को जागरुक करने की जरुरत है!









