लाइलाज है शाहजहाँपुर राजकीय मेडिकल कालेज की बीमारी!
अस्पताल प्रशासन नही मुहैया करा रहा बेहतर सुविधाएँ! जरुरत है डिप्टी सीएम के विजिट की!

CRS शाहजहाँपुर-जिला अस्पताल वर्षों पहले उच्चीकृत होकर मेडिकल कालेज हो गया, शासन स्तर से आवंटित बजट में भी कई गुना वृद्धि हो गयी, लेकिन जनमानस अब तक भौतिक सुविधाओं से वंचित है!
जनपद में स्थित मेडिकल कालेज के हालात बद से बदतर हैं! मरीजों का उपचार कराने आते तीमारदारों को बेहद ठोकरों के बाद सफलता प्राप्त होती है! उपचार व्यवस्था के अलावा परिसर की स्वच्छता और पेयजल की उपलब्धता के मामले में भी मेडिकल कालेज की दशा दयनीय है!
अस्पताल के सर्वाधिक महत्वपूर्ण बिभाग अर्थात ट्रामा सेंटर का हाल यह है कि यहाँ पर आने वाले मरीजों की इंट्री करके सम्बंधित चिकित्सक घंटों के लिए मरीज को भूल जाते हैं! फर्स्ट-एड” के नाम परऔपचारिकता मात्र निभायी जाती है! यहाँ की स्वच्छता का जिक्र करें तो सीलिंग फैन और एसी इक्विपमेंट पर जमी धूल की परत जिम्मेदारों के रवैये की कहानी कह रही है! ट्रामा सेंटर में अपने अपने मरीज के इलाज के लिए तीमारदार अक्सर हो-हल्ला मचाते रहते है! वहीं महिला वार्ड में बन्द पड़े ढेरों सीलिंग फैन स्वास्थ्य लाभ की जगह मरीजों को पसीना-पसीना कर रहे हैं!
जो लोग दवा लेने के लिए ओपीडी आते हैं, चिकित्सक उन्हे लाल पीली गोलियाँ देकर टरका देते हैं! बताया कि मेडिकल कालेज तो केवल नाम का है! प्रशासनिक भवन से लेकर परिसर के कदम कदम पर जनता को अव्यवस्था और असुरक्षा ही नजर आती है! सूबे के छोटे मुखिया और चिकित्सा मंत्री डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक हर रोज प्रदेश के जिलों में पहुँचकर औचक निरीक्षण कर रहे हैं! स्वास्थ्यकर्मियों को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ा रहे हैं, बावजूद इसके शाहजहाँपुर के मेडिकल कालेज स्टाफ ने उनके सबक को अपने जेहन में उतारने की जरूरत नहीं समझी! जनता की माने तो मेडिकल कालेज के भी औचक निरीक्षण की जरूरत है! जरूरत है कि अकस्मात पहुँचकर डिप्टी सीएम राजकीय मेडिकल कालेज के स्टाफ को ट्यूशन दें और कार्यवाही का ऐसा चाबुक चलायें जिससे निर्धन, जरूरतमंद, निम्नवर्ग जनता और मरीजों के मौलिक अधिकार की संरक्षा हो सके!
राजकीय मेडिकल कालेज के मैं गेट पर वाहन स्टैंड स्वामी के गुर्गों का जबरदस्त पहरा रहता है। मेन गेट पर उक्त लोगों द्वारा वैरियल लगाया गया है! गाँव से आने वाली कमजोर गरीब बाइक सवार जनता को हड़काकर, धमकाकर बाइकों को स्टैंड पर लाने के लिए मजबूर किया जाता है और उसके बदले मनमानी वसूली की जाती है!
मेडिकल कालेज में रात के दौरान असामाजिक तत्वों का दबदबा स्थापित हो जाता है। तीमारदारों के साथ परिसर में अक्सर चोरी, छिनैती की घटनाएं हो जाती हैं! मेडिकल कालेज में स्थित पुलिस चौकी भी किसी काम की नही है! जिम्मेदारियों से कोसों दूर चौकी के पुलिसकर्मी भी अपने दायित्व के प्रति बिलकुल जिम्मेदार नहीं हैं, जिस कारण मेडिकल कालेज परिसर में असामाजिकता को बढ़ावा मिलता है!









