निकाय चुनाव में कम मत प्रतिशत मतदाताओं की वजह से नहीं बल्कि मतदाता सूचियों की त्रुटियों की वजह से हुआ!
वरिष्ट पत्रकार रमेश शंकर पांण्डेय की क़लम से!
CRS शाहजहाँपुर-इस बार निकाय चुनाव में मत प्रतिशत काफी कम रहा शासन-प्रशासन तथा राजनीतिक दलों के अथक प्रयासों के बावजूद मत प्रतिशत का कम होना एक विचारणीय प्रश्न है ? मेरी समझ से मत प्रतिशत में कमी मतदाताओं की उदासीनता को मानना अनुचित होगा क्योंकि इस बार मतदाता सूचियों में इतनी भयंकर गड़बड़ी थी कि अधिकांश मतदाता चाहते हुए भी अपने मत का प्रयोग नहीं कर सके! प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई कई मोहल्ले दो दो वार्डो में जुड़े हुए देखे गए जहां हजारों की संख्या में मतदाता दो दो स्थानों पर मतदाता बनाए गए वही हजारों की संख्या में मतदाताओं का नाम सूचियों से गायब रहा! यही नहीं मतदाता सूची में मृतकों के नाम तथा हजारों की संख्या में ऐसे नाम जुड़े देखे गए जो निर्वाचन क्षेत्र में रहते ही नहीं है जिससे यह स्पष्ट होता है कि मतदाता सूचियों वृहद स्तर पर फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़े गए और असली मतदाताओं के नाम षड्यंत्र रच कर कटवाए गए! वह तो अच्छा हुआ कि इस बार निर्वाचन आयोग द्वारा आधार कार्ड की अनिवार्यता के चलते ही फर्जी मतदाता तो अपना मतदान नहीं कर सके फर्जी मतदान कराने के लिए कई स्थानों पर फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम भी हुआ! कई स्थानों पर पुलिस ने ऐसे मामलों को पकड़ा भी है, लेकिन काफी संख्या में फर्जी आधार कार्ड के जरिए लोगों ने मतदान कर भी दिया किंतु असली मतदाता, मतदाता सूचियों में नाम गायब होने के चलते मतदान से वंचित रहे जिसके कारण मत प्रतिशत काफी कम हो गया! यह एक गंभीर मामला है यदि यही स्थिति विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में रही तो हालात और भी खराब होंगे! शासन और प्रशासन को मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का मामला गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लेना चाहिए तथा मतदाता सूचियों में इतनी भयंकर गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों से स्पष्टीकरण लेकर उन्हें दंडित अवश्य किया जाना चाहिए अन्यथा लोकतंत्र की यह निर्वाचन व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त होकर रह जाएगी और इसका कोई औचित्य नहीं रहेगा!








