
ऊँचाहार,रायबरेली। रत्नों में शुमार एनटीपीसी परियोजना में भी भ्रष्टाचार ने अपने पैर पसार लिए हैं। जिसकी तहकीकात करने पर उनकी परतें खुलने लगी है। इसी परियोजना के यूटिलाइजेशन विभाग में तैनात एक संविदा कर्मी और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से राख वितरण में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है।
सूत्र बताते हैं कि संविदा कर्मी संजय यादव और डीजीएम पद पर तैनात तरित बंगाल तथा कुछ अन्य अधिकारियों ने मिलकर कूट रचित ढंग से फर्जी कंपनी बनाकर उनके नाम पर परियोजना से निकले ऐश (राख) को मुफ्त में वितरण किया गया है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक शख्स ने बताया कि आसपास के क्षेत्रों में ऐश से ईंट बनाने के लिए एनटीपीसी मुफ्त में ऐश (राख) प्रदान करती है जबकि दीगर सीमेंट कंपनियों को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है। इसी का फायदा उठाने के लिए संविदा कर्मी संजय यादव कुछ लोगों के साथ मिलकर षड्यंत्र के तहत ब्रिक निर्माण की कुछ अलग-अलग कंपनियां बनाई और उनको मुफ्त में राख दिया गया । जबकि इनमें से ईंट बनाने वाली कुछ कंपनियां केवल कागजों तक ही सीमित है जबकि जमीन पर उनका कोई वजूद नहीं मिला इस बात की जब तहकीकात शुरू की गई तो पता चला इन कंपनियों में एनटीपीसी के कुछ अधिकारी व संविदा कर्मी संजय यादव की सीधे तौर संलिप्तता है और वो मुफ्त की राख को बेचकर मोटी रकम अर्जित करके उस रकम का आपस में बंदरबांट कर लेते हैं । बताने वाले शख्स का दावा की उसके इनके भ्रष्टचार के पुख्ता सुबूत हैं। जिनके आधर पर अगले अंक में इसका विस्तार से खुलासा किया जायेगा। मामले का खुलासा होने के बाद भ्रष्टाचार में संलिप्त लोगों के हाथ पैर फूलने लगे हैं। फ़ूलेंगें भी क्यूँ नहीं? खुलासा होने के बाद जेल की हवा जो खाना पड़ेगा। अब सीधे तौर पर संविदा कर्मी और कुछ विभागीय अधिकारियों पर जाँच की तलवार लटक रही है। कुछ लोगों ने इस बात की शिकायत क्षेत्रीय विधायक से करके मांग की है कि मामले की जांच करा कर भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए तथा इसमें लिप्त संविदा कर्मी को नौकरी से बर्खास्त कर उसके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया जाये।










