बक्त बदलने के साथ ही शाह के सालाना उर्स को राजनीतिक रूप मिल गया पहले 30 पुरानी बात कहाँ…?
CRS तिलहर/शाहजहाँपुर-गुजरते और बदलते बक्त ने उर्स की शान-ओ-शौकत इतनी बड़ी रहीसी में बदल गई कि मुहब्बत रखने वाले गरीब और मिडिल क्लास जायरीनो की जगह अब अमीरी और राजनीति ने ली’ इबादतो की जगह अब मुशायरो और कब्बालियों ने ली! लगभग तीस साल पहले तक उर्स में पहुंचने वालो जायरीनो की संख्या लाखो से घट कर अब सैकड़ो में ही दिखाई पड़ने लगी! हजारो के चंदे ने भले ही लाखो का रूप ले लिया हो लेकिन लाखो जायरीन अब सिर्फ सैकड़ो में ही दिखाई पड़ते हैं!
सज्जादा नशीन इक़बाल हुसैन उर्फ फूल मियाँ की सरपरस्ती में 11 जनबरी 2025 को सैयद शाह शमशुद्दीन मियाँ रहमतउल्ला अलैह का 190 वाँ उर्स शुरु होने वाला है! इससे पूर्व फूल मियाँ के बालिद मोहतरम जनाब अनबार मियाँ साहब और उनसे पहले दादा जान जनाब सैयद हाफिज़ हाजी हाथम शाह मियाँ की जेरे परस्ती में शमशुद्दीन मियाँ रह० का उर्स होता रहा है!
ज्यादा नही हम सिर्फ 30 साल पीछे के अपने होश संभालने के उर्सो पर गौर करें तो उस बक्त में इस सालाना उर्स में कच्चा कटरा दरगाह से लगभग एक कि०मी० पूरव की ओर भख्सी तिराहा व इससे भी काफी दूर मुख्य चौराहा बिरियागंज तक उर्स के सप्ताह भर पहले जायरीनो की भीड़ का आलम इतना होता कि सड़को पर जाम रहता!
कुरान ख्वानी से शुरू होता उर्स का पहला पूरा दिन बड़ी मस्जिद, भर में इबादत की गहमागहमी से गुजरता और फिर बाद नमाज़इंशा मस्जिद में (मिलाद) तकरीर को सुनने के लिए भीड़ से निकलने मे़ मस्जिद तक पहुंचे में घंटो का बक्त लग जाता तो कभी कभी एक प्याली (मिट्टी की) तबर्रुक के लिए भारी भीड़ को कई घंटो में चीर कर पहुंचना बड़ा मुश्किल काम था लेकिन मुहब्बत आखिर पहुंचाई ही देती थी!
बताते हैं कि बीते 1 सौ 89 साल में भले ही फातिहा का तरीका न बदला हो लेकिन बदलते वक्त ने उसके बाकी और कानों को राजनीतिक रंग दे करके जायरीनो में उर्स के आकर्षण में बहुत कुछ बदलाव करते हुए नगर में साल में एक बार लगभग सप्ताह भर रहने वाली चहल-पहल और भीड़ को पूरी तरह घटकर बहुत कम कर दिया है!
सूत्रों की माने तो हर साल सैयद शाह शमसुद्दीन मियां के उसको मनाने में लगभग 10 लाख रुपया तीन दिन में खर्च होने की संभावना व्यक्त की जाती है लेकिन जिस तरह से जायरीनो की आमद लगातार घट रही है और उसका खर्चा बढ़ रहा है तब यह सवाल स्वयं ही बन जाता है कि बीते तीन दशक के मुकाबले जहाँ जायरीनो की संख्या न के बराबर होती जा रही हैं तो आखिर यह सब पैसा खर्च कहाँ होता आ रहा है!









