Oplus_131072
CRS NEWS AGENCY : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि वह वांगचुक के बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है और “राई का पहाड़” बना रही है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज ने तर्क दिया कि वांगचुक ने युवाओं को उकसाया और लद्दाख में ‘नेपाल जैसे हिंसक आंदोलन’ की चेतावनी दी थी। अदालत ने सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि वांगचुक के बयान चिंता व्यक्त करने के लिए थे, न कि हिंसा की धमकी। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि वांगचुक खुद इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कुछ लोग गांधीवादी शांतिपूर्ण तरीकों को छोड़ रहे हैं। तब और तेज हो गई जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत द्वारा वांगचुक के बयानों के संबंध में महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण तरीकों का जिक्र करने पर आपत्ति जताई और इसे “भारत-विरोधी” कहा। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें बाहरी सुर्खियों से कोई सरोकार नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि: यह विवाद सितंबर 2025 में लेह में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों से शुरू हुआ, जिसमें लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई थी। सरकार का कहना है कि वांगचुक की हिरासत इसलिए जरूरी है क्योंकि उनके भाषण एक संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगाड़ सकते हैं।
वर्तमान स्थिति: सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की हिरासत से संबंधित सभी दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी है और ASG को मामले को और ज्यादा न खींचने की सलाह दी है। अब पूरे देश की नजर इस पर है कि सोनम वांगचुक को राहत मिलेगी या वे हिरासत में ही रहेंगे।










