
CRS NEWS : लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान विज्ञान शिक्षकों की कमी जैसे गंभीर मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शायरी के माध्यम से तीखी बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने इंटर कॉलेजों में विज्ञान संकाय, प्रयोगशालाओं और स्थायी शिक्षकों की कमी को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया, जबकि माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने काव्यात्मक अंदाज़ में सरकार का पक्ष रखा।
प्रश्नकाल के दौरान डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी और अनुदानित इंटर कॉलेजों में विज्ञान शिक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं है। बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं और छात्र-शिक्षक अनुपात असंतुलित है, जिससे डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने का सपना देखने वाले गरीब बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा भी पूछी।
अपनी बात को धार देने के लिए डॉ. रागिनी ने सदन में शायरी पढ़ी—
“श्री राम चन्द्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा,
मेरे नाम से सत्ता पाकर सबको आंख दिखाएगा।
धर्मों को लड़वाएगा और जाति को बटवाएगा,
सभी गरीब के बच्चों को बिन शिक्षा रौंदा जाएगा।”
शायरी खत्म होते ही विपक्षी बेंचों से मेज थपथपाने की आवाजें गूंज उठीं।जवाब में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी शेर के ज़रिए पलटवार किया—
“जानकर अंजान बने, ये कुछ और बात है,
इनको मालूम न हो, ये कुछ और बात है।
सूर्य की किरणें कितनी भी चमचमाएं,
लेकिन सागर को सुखा नहीं सकती हैं।”
इस पर सत्ता पक्ष की ओर से भी मेजें थपथपाई गईं। मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चरणबद्ध तरीके से भर्तियां कर रही है और स्कूलों में आधारभूत ढांचे का विकास किया जा रहा है।
विज्ञान शिक्षकों की कमी जैसे गंभीर मुद्दे पर शायरी के इस सियासी संग्राम ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के माहौल को कुछ देर के लिए खुशनुमा जरूर बना दिया, लेकिन सवाल अब भी कायम है—क्या ज़मीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था उतनी ही मज़बूत हो पाएगी, जितनी मज़बूत सदन में कही गई पंक्तियाँ थीं?









