परशदेपुर रायबरेली-
राहगीरों की जान जोखिम में डालकर नाबालिक बच्चे बिना लाइसेंस के सलोन परशदेपुर नसीराबाद जायस रोड पर फर्राटा भर रहे हैं सबसे बड़ी बात यह कि
में ई-रिक्शा बिना रजिस्ट्रेशन के दौड़ रहे हैं इतनी ओवरलोडिंग होने के बाद भी जिम्मेदार है बेखबर बिना लाइसेंस ई – रिक्शा नाबालिक सड़कों पर यमदूत बनकर वाहन को दौड़ा रहे हैं आए दिन एक न एक बड़ी दुर्घटना होती है ई-रिक्शा विक्रेता भी बिना पंजीकरण के कारोबार को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं कस्बे के हालात यह हो गए हैं कि पार्किंग स्थल ना होने से बिना स्टैंड के हिसाब से जगहों पर ई रिक्शा का रेला रहता हैं जबकि इस समय हर तरफ ई रिक्शा चालकों की सड़कों पर ही कब्जा जमाने से ट्रैफिक व्यवस्था समस्या बवाल- ए -जान बनी हुई है रिक्शा चालकों की वजह से आए दिन होते हैं एक न एक बड़े बवाल तथा एक न एक बड़ी घटनाएं प्रशासन रहता है मौन ई -रिक्शा चालकों का जहां मन करता है वहां खड़ी करके सवारी भरने लगते हैं एक -एक स्टॉप पर 100/100 ई-रिक्शा खड़ा रहता है 25% रजिस्ट्रेशन है तो 75% ऐसे ही फर्राटा भर रहे हैं आखिरकार जिम्मेदार बेखबर क्यों क्यों नहीं पड़ती इन पर दृष्टि जिम्मेदार अधिकारी क्यों रहते हैं मौन रिक्शा चालकों को जब राहगीर बोल देता है तो ई रिक्शा चालक दबंगई करने लगते हैं तथा मारपीट पर उतारू हो जाते हैं आखिर कर इतना बड़ा श्रेय देता कौन है शासन-प्रशासन कभी भी कोई बड़ी या छोटी दुर्घटना होती है तो आम जनता इस पर किस पर कार्रवाई का मांग करें ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन तो होता नहीं चालक मौके पर भाग जाता है तथा कार्रवाई पर अड़चन पैदा होने लगती है लास्ट में कार्रवाई तो होती नहीं प्रशासन भी कहता है सबूत लाओ आखिरकार कब तक प्रशासन की मिलीभगत से चलता रहेगा या खेल जबकि सरकार की गाइड लाइन के अनुसार ई-रिक्शा केवल नगरी क्षेत्र में 3 किलोमीटर के अंदर चल सकता है प्रशासन इतना मेहरबान है कि सलोन परशदेपुर धराई मेहंदी नसीराबाद जायस तक आसानी से चले जाते हैं तथा वापस आ जाते हैं 3 किलोमीटर की जगह 30 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं राहगीरों से अनाप-शनाप किराया भी वसूल करते हैं और ना देने पर मारपीट भी करने लगते हैं कब तक प्रशासन की मेहरबानी से बिना परमिट के ऐसे ही दौड़ते रहेंगे ई-रिक्शा आखिर कर जिला प्रशासन कब करेगा कार्रवाई !









