गौशाला की बदनामी से बेहतर है नगर में जानबरो के अस्पताल की स्थापना!
(CRS इमरान सागर की क़लम से)
तिलहर शाहजहाँपुर-घायल और बीमार गौवंश को गौशाला में पहुंचाना तब सही हो सकता है जब वहाँ प्रतिदिन ईलाज के लिए एक डॉक्टर की व्यवस्था और साथ ही बीमार और घायल गौवंश या गाय को अलग रखने की व्यवस्था हो! डॉक्टर एंव अलग वार्ड की व्यवस्था से पहले घायल/बीमार गाय या गौवश को गौशाला में जबरन रखने से गौशाला की और भी कई गाय, वछड़ा, वछिया आदि बीमारी की चपेट में आ सकते हैं!
बताया जाता है कि विकास खंण्ड कार्यालय परिसर में दशको से जानबरो का ईलाज करने की व्यवस्था है और नगर व नगर के आसपास घूम रहे गौवंश यदि बीमार हो जांय या किसी कारण दुर्घटना के शिकार हो घायल हो जांय तो सबसे पहले उन्हे, उसी अस्पताल में ले जाकर चिकित्सा करानी चाहिए और स्वास्थ्य होने पर गौशाला के सुपुर्द कर देना चाहिए, परन्तु वर्तमान में इस सबसे इतर, गौवंश की दुर्दशा किए जाने में नगर पालिका परिषद द्वारा संचालित नगर के स्टेशन रोड स्थापित एक मात्र गौशाला सोशल मीडिया पर सिर्खियों में रहती नज़र आती है!
कहना कदापि गलत नही होगा कि वर्तमान परिस्थितियाँ गलत न होने के बाद भी आखिर गौशाला की परिस्थिति को सोशल मीडिया पर बार बार गलत क्यूं साबित किया जा रहा है यह चितंन और मंथन का विषय है! तमाम जागरुकता के बाद आज भी कथित गौ पालक, सुबह शाम भले ही कुछ खिला कर दूध निकाल ले परन्तु उसके बाद वे अपना पेट भरने को दिन रात नगर की सड़को और गलियों में भटकती मिलती हैं! कथित गाय प्रेमियों को चैहिए कि गौशाला को बदनाम करने से कई बेहतर है, उन्हे नगर में गौवश के लिए एक ऐसे अस्पताल की स्थापना करने की मांग रखनी चाहिए जिसमें घायल और बीमार गाय व नंदियों को उनके स्वस्थ्य रहने तक डॉक्टर की देखवाल मिलती रहे!
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