
ऊंचाहार, रायबरेली। करीब नौ माह पूर्व गौशाला में मृत गौवंशो के निस्तारण में लापरवाही मामले में गौवध निवारण अधिनियम समेत गम्भीर धाराओं में न्यायालय के आदेश पर आखिरकार ग्राम प्रधान, बीडीओ, पशु चिकित्साअधिकारी ग्राम विकास अधिकारी समेत कुछ अज्ञात पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा दर्ज होते ही आरोपियों के हाथ पांव फूलने लगी हैं। सभी आरोपी बचने की जतन में जुट गए हैं।
विदित हो कि बीती 24 जनवरी को धूता ग्राम पंचायत स्थित अस्थाई गौशाला में संदिग्ध परिस्थितियों में 150 गौवंशों की मृत्यु हो गई थी। कुछ गौवंशों की हालत गम्भीर थी। आरोप है कि उनके निस्तारण में लापरवाही बरती गई है। गौवंशों के चमड़े व गौमांस उतारे गए, उनके अवशेष छोटे छोटे गढ़ों में चोरी छिपे दफनाए जा रहे थे। शिकायत के बाद एसडीएम द्वारा दिए गए पोस्टमार्टम के आदेश का विपक्षियों द्वारा पालन न करने का आरोप है। इस मामले में पूरे भीट मजरे धूता निवासी उमानाथ सिंह ने ग्राम प्रधान की मौजूदगी में गौवंशो के चमड़ी व गौमांश उतारने को देखने के बाद दखल देने पर ग्राम प्रधान द्वारा गाली गलौज धमकाने आदि की उच्चाधिकारियों से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उमानाथ ने न्यायालय की शरण ली करीब नौ माह बाद आखिरकार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नम्बर 09 ने मामले में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। शनिवार को गदागंज पुलिस ने
ग्राम प्रधान बलराम यादव, खण्ड विकास अधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी समेत कुछ अज्ञात के विरुद्ध गौवध निवारण अधिनियम समेत गम्भीर धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर लिया है। गदागंज में मुकदमा दर्ज होते ही सभी आरोपी बचने की जतन में सत्ताधारी नेताओं और कई तरह के सेटिंग गेटिंग में जुट गए हैं।










