
*धमधमा ग्राम की जमीन पर कब्जा, लेखपाल की गलत रिपोर्टिंग से भाजपा सरकार की छवि पर दाग!*
*धमधमा ग्राम सभा में बंजर भूमि व तालाब पे किए गए अवैध कब्जे को हटवाए जाने को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से लगाई गुहार, क्षेत्रीय लेखपाल पर लगाया मिलीभगत का आरोप*
*गदागंज, रायबरेली।*
डलमऊ तहसील के धमधमा गांव में ग्राम सभा की कीमती बंजर भूमि और तालाबों पर अवैध कब्जे का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज़ ग्रामीणों ने गुरुवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर क्षेत्रीय लेखपाल मनोज पाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल मनोज पाल द्वारा पोर्टल पर की गई शिकायतों की जांच में जानबूझकर गलत रिपोर्ट दी जा रही है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है और अवैध कब्जेदारों को संरक्षण मिल रहा है।
गाटा संख्या 40 पर छप्पर व फंटी, बल्ली रखकर कब्जा किया गया है और एक अन्य ने कोठरी बना ली है, लेकिन रिपोर्ट में “बताया गया कि आवास आवंटन है” ।
गाटा संख्या 67 पर एक व्यक्ति छप्पर और कोठरी बनाकर होटल चला रहा है, पूर्व लेखपाल ने नोटिस दी थी, वर्तमान लेखपाल ने इसे भी “खाली” बताया।
गाटा संख्या 316 पर अवैध कब्जा कर निशानदेही और मेड बांध दी गई है, फिर भी लेखपाल ने बताया “खाली पड़ी है”।
गाटा संख्या 18 (तालाब) पर 15 से अधिक लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिसकी पहले शिकायत दर्ज थी, अब उसे “मत्स्य पालन का आवंटन” बताया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान लेखपाल द्वारा जानबूझकर गलत आख्या दी जा रही है और मोटी रकम लेकर शिकायतों की खानापूर्ति की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि अवैध कब्जों को संरक्षण दिया जा रहा है और सरकारी जमीनों पर खुलेआम कब्जे हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने लेखपाल और ग्राम प्रधान की मिलीभगत की भी शिकायत की और मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का सवाल – क्या सरकार की छवि बिगाड़ने की छूट मिली है जिम्मेदार अफसरों को?
अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं या फिर ये शिकायतें भी फाइलों में दबी रह जाएंगी।










