
CRS NEWS : प्रयागराज। माघ मेले के मौनी अमावस्या स्नान पर्व के दौरान संगम क्षेत्र में उस समय विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा बिना पूर्व अनुमति रथयात्रा/शोभायात्रा निकालने का प्रयास किया गया। मेला प्रशासन के अनुसार, उस समय संगम क्षेत्र में करोड़ों श्रद्धालु स्नान के लिए मौजूद थे और भीड़ अत्यंत संवेदनशील स्थिति में थी।
प्रशासन ने पहले से ही मौनी अमावस्या के दिन भीड़ नियंत्रण और जनसुरक्षा के मद्देनजर सभी प्रकार की शोभायात्राओं और रथयात्राओं पर रोक लगा रखी थी। स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि संत और श्रद्धालु निर्धारित मार्गों से पैदल एवं नियंत्रित व्यवस्था के तहत ही संगम स्नान करेंगे।
इसी बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर से पालकी पर सवार होकर रथयात्रा के स्वरूप में संगम की ओर बढ़े। मेला प्रशासन का कहना है कि इस यात्रा के लिए न तो कोई लिखित अनुमति ली गई थी और न ही इसकी पूर्व सूचना दी गई थी। संगम पहुंचने से पहले पांटून पुल नंबर दो के पास पुलिस बल ने रथयात्रा को रोक दिया और नियमों के अनुसार पैदल स्नान करने का अनुरोध किया।
शिष्यों के विरोध से बिगड़ी स्थिति
रथयात्रा रोके जाने के बाद उनके शिष्यों द्वारा विरोध शुरू कर दिया गया, जिससे मौके पर नोकझोंक और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आरोप है कि कुछ शिष्यों ने बैरिकेडिंग को हटाने का प्रयास किया, जिससे कुछ समय के लिए संगम मार्ग पर अव्यवस्था फैल गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कुछ शिष्यों को संगम थाना ले जाया गया।
धक्का-मुक्की के दौरान पालकी का छत्र-चंवर टूटने की भी सूचना है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि किसी के साथ जानबूझकर कोई अभद्रता नहीं की गई और न्यूनतम बल का प्रयोग करते हुए स्थिति को शांत कराया गया।
प्रशासन का स्पष्ट पक्ष
मेला प्रशासन ने कहा है कि संत समाज का सम्मान सर्वोपरि है, लेकिन मौनी अमावस्या जैसे अत्यंत भीड़भाड़ वाले स्नान पर्व पर नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है। बिना अनुमति रथयात्रा निकलने से आम श्रद्धालुओं को गंभीर परेशानी हो सकती थी और किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता था।अधिकारियों के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को वैकल्पिक और सुरक्षित तरीके से ससम्मान स्नान कराने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने अपने शिविर के बाहर प्रशासन के खिलाफ धरना शुरू कर दिया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि माघ मेले की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की अव्यवस्था दोबारा न हो।








