कल, आज, और कल, बदलता वक्त! धीरे-धीरे तिलहर में खत्म होती राष्ट्रीय पर्व कार्यक्रमों की भव्यता!

CRS शाहजहांपुर_तिलहर-77वें गणतंत्र दिवस को पालिका प्रशासन ने कार्यालय प्रागण लगभग 9:45 मिनट पर समापन कर दिया गया। आयोजित कार्यक्रम में अधिकांश पालिका कर्मी भी दिखाई नहीं दिए साथ ही गणतंत्र गरिमा इतिहास पर रोशनी डाली जाती भी नजर नहीं आई! समझा जा सकता है कि जैसे धीरेधीरे राष्ट्रीय पर्वों पर होने वाले कार्यक्रमों की भव्यता खत्म हो रही हो!
इससे पूर्व पालिका प्रांगण स्थित गांधी मैदान, स्थापित, महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद ठीक 8:30 पर पालिका अध्यक्ष श्रीमती हाजरा बेगम द्वारा ध्वजारोहण कर तिरंगा फहराया गया! इस दौरान उनके साथ अधिशाषी अधिकारी सतेंद्र प्रकाश मौजूद रहे!
देश का लागू होने को यादगार बनाए रखने के लिए हर वर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय पर्व, स्थानीय स्तर की नगर पालिका में पूर्व की भांति भव्यतापूर्वक नजर न आते हुए खाना पूर्ति होता मात्र नजर आया! हालांकि उक्त कार्यक्रम में निमंत्रण की समस्त प्रक्रियाओं को जिम्मेदारी के साथ निभाया गया परंतु उसके बाद भी वक्ता और श्रोताओं की बड़ी संख्या नदारद रही!
किसी प्रोग्राम की भव्यता, उसका अरेजमेंट करने वाले का जज्बा होने पर निर्भर करता है! यदि जज्बा नहीं तो फिर पड़ेगी कि भव्यता कोई मायने नहीं बल्कि यूं समझो कि किसी भी प्रोग्राम की भव्यता उसमें पहुंचने वाले वक्ताओं और उन्हें सुनने वाले श्रोताओं पर पूरी तरह निर्भर होती है परंतु प्रोग्राम कराने वाले का जज्बा इस पूरे खाके में सबसे ऊपर होता है!
विगत के वर्षों में राष्ट्रीय पर्व स्वतन्त्र व गणतंत्र दिवस मनाए जाने भव्यता नगर भर के लिए कौतूहल का लंबा विषय रहा करता! सुबह समय से कार्यक्रम चालू होकर दिन के लगभग 2 बजे तक पूरे शबाब पर रहने का मुख्य कारण, आयोजकों का जज्बा देख श्रोताओं की देश भक्ति देखने को मिलती रहती! कानून निर्माता बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव आंबेडकर की ही प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं होता बल्कि नगर के पश्चिमी और शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करने के जज्बे में एक बड़ी भीड़ पालिका प्रांगण से पैदल ही लंबा रास्ता तय कर लेती थी और इस देश भक्त भीड़ का नेतृत्व अधिशाषी अधिकारी व पालिका अध्यक्ष, संयुक्त रूप से दिली जज्बे के साथ करते रहे! अब तो न आज कुछ हो सका और न कल की उम्मीद ओर जो गुजर गया कल वो वापस क्या है परंतु यक़ीनन देश और उसके उसके संविधान के पार्टी जज्बा रखने वालो की कमी नहीं है! कार्यक्रम को भव्य बनाए जाने के लिए, बस उन्हें हृदय से आमंत्रित किए जाने और सम्मानपूर्वक कार्यक्रम में सम्मान उनके व्यक्तव्यों की सराहना करने की आवश्यकता है!









