
CRS NEWS AGENCY: हाल की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के बीच जब P. विल्सन ने UGC की भूमिका और उच्च न्यायालय के फैसले पर बहुत ही आक्रामक और तीखी दलीलें पेश करना शुरू किया तो बहस काफी व्यक्तिगत और शोर-शराबे वाली हो गई। CJI सूर्यकांत ने टोकते हुए कहा, “कृपया खुद को याद दिलाएं कि यह असेंबली नहीं है, भारत का उच्चतम न्यायालय।”
आपको बता दें कि एक अन्य केस में तमिलनाडु में कुलपतियों की नियुक्ति के अधिकार को लेकर चल रही कानूनी जंग में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है।बीते दिनों को शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा इन कानूनों पर लगाए गए अंतरिम स्टे को रद्द कर दिया, लेकिन साथ ही एक शर्त भी रखी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के मई 2025 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने राज्य सरकार के नए कानूनों पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट की वेकेशन बेंच ने राज्य सरकार को जवाब देने का पर्याप्त मौका दिए बिना जल्दबाजी में कानून पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट से कहा कि वह इस संवेदनशील मामले पर 6 सप्ताह के भीतर अंतिम फैसला सुनाए। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और पी. विल्सन ने अदालत को आश्वासन दिया कि जब तक हाई कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक राज्य सरकार कोई नई नियुक्ति नहीं करेगी।








