
CRS NEWS AGENCY :- मध्य प्रदेश के जबलपुर के 19 वर्षीय NEET अभ्यर्थी अथर्व चतुर्वेदी का एक विशेष साक्षात्कार हुआ , जिन्होंने अपनी प्रोविजनल MBBS सीट सुरक्षित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में खुद अपना केस लड़ा।
⚖️ कानूनी लड़ाई और संघर्ष
अथर्व ने निजी संस्थानों में EWS आरक्षण प्रदान न करने की राज्य सरकार की नीति को चुनौती दी। हाई कोर्ट ने एक साल के भीतर आरक्षण लागू करने का आदेश दिया, लेकिन अथर्व को व्यक्तिगत राहत नहीं मिली। इसके बाद, उन्होंने अनुच्छेद 136 के तहत सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।
‘पार्टी इन पर्सन’ : बिना किसी कानून की डिग्री के, अथर्व ने खुद अदालत में बहस की। उनका मानना था कि वह जजों के सामने अपने तर्कों को किसी भी वकील से बेहतर ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं
जज अथर्व की स्पष्टता, शांति और कानूनी ज्ञान से बेहद प्रभावित हुए। उनकी क्षमता को देखते हुए, जजों ने उन्हें कानून (Law) में करियर बनाने तक का सुझाव दे दिया।
ऐतिहासिक फैसला : सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए एक सप्ताह के भीतर उन्हें प्रवेश (Admission) देने का आदेश दिया। यह मामला अब अन्य छात्रों के लिए एक न्यायिक मिसाल बन गया है।
📚 तैयारी और मार्गदर्शन
गहन अध्ययन : अथर्व ने 103वें संशोधन और ‘जनहित अभियान बनाम भारत संघ’ जैसे महत्वपूर्ण फैसलों का अध्ययन करके तैयारी की। उनके पिता, जो कि एक अधिवक्ता हैं, ने उन्हें प्रेरित और निर्देशित किया।
सुशांत की भूमिका : उनके मेंटर सुशांत ने उन्हें अपने तर्कों को कालानुक्रमिक (chronological) क्रम में रखने की सलाह दी। सुशांत खुद एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर NLU दिल्ली और लंदन विश्वविद्यालय तक पहुँचे हैं।
💪 समर्पण और सादगी
शिक्षा पर ध्यान : इतनी बड़ी जीत और मीडिया का ध्यान मिलने के बावजूद, अथर्व अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहे। उन्होंने अपनी लाइब्रेरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद देर रात साक्षात्कार के लिए समय निकाला।









