शाहजहाँपुर पुलिस की लापरवाही की पोल खोलती घटना!
लगभग पौने 2 साल बाद बोतल सें निकला अधजले शव का जिन्न! उस पर भी हो रही है खाना पूर्ती!

CRS न्यूज़ एजेंसी शाहजहाँपुर!
जिला के रोज़ा थाना अन्तर्गत करीब बीते पौने दो साल बाद, एक मोबाइल शॉप के अंदर मिले, अधजले शव की शिनाख्त के साथ जिन्न बाहर आ गया! मृतक पुत्र के बेबस पिता द्वारा अधिकारियों की चौखट पर चप्पले घिसते लम्बा अर्सा गुजरने के बाद बुधवार अपराह्नत क्षेत्रिय पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम सें पहले अधजली लाश सें बरामद, सामान का पुलिंदा खोलकर गुमशुदा बेटे के पिता को बामुश्किल दिखाई गई! उसमें मौजूद सामान को देख बरबस ही पिता की आंखों में आंसू आ गए, और पिता राम औतार बोला साहब, ये सारा सामान मेरे बेटे का ही है!
गौरतलब हो कि 19/दिसंबर 2020 को थाने सें महज़ चंद कदम की दूर नेशनल हाई-वे स्थित,रोज़ा अड्डे मेन चौराहे पर, क्षेत्र के ही नईम की मोबाइल शॉप की दुकान थी! नईम के मुताबिक, उस रात करीब साढ़े आठ बजे, वह दुकान बंद करके घर चला गया था! रात में करीब एक बजे, उसकी दुकान में आग लग गई थी, और सारा सामान जलकर राख हो गया था! घटना के दूसरे दिन सुबह दुकान में जाकर देखा तो दुकान के अंदर एक अधजला शव पड़ा हुआ है! जिसे थाना रोज़ा पुलिस ने जानवर का बताकर, रेलवे अस्पताल के पीछे तालाब किनारे फेंक दिया था! जब क्षेत्र में शव इंसान के होने की चर्चा हुई, तो आनन-फानन में उच्चाधिकारी मौके पर पहुँच गए, और पशु चिकित्सक को बुलाकर जांच कराई गई! पशु चिकित्सक ने इंसानी शव होने की संभावना जताई थी! इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था, पोस्टमार्टम में भी इंसानी शव की पुष्टि हुई! पोस्टमार्टम के बाद शव के शरीर सें एक कड़ा, एक ताबीज व अधजला अंडरवियर मिला था! पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित कर लिया गया था, इस मामले में पुलिस की जमकर किरकिरी भी हुई थी! हालांकि बंद दुकान के अंदर आग लगने की घटना संदिग्ध है, क्योंकि दुकान में बिजली कनेक्शन न होने के कारण शॉटसर्किट की भी संभावना नहीं थी! सवाल यह भी उठता है कि आख़िर एक बंद दुकान के अंदर कोई व्यक्ति कैसे घुसा था,और आग कैसे लगी थी.? रोज़ा पुलिस के पास इस पूरे मामले का कोई ज़बाब नही था!
उधर दूसरी ओर आरसी मिशन थाना क्षेत्र के फतेहपुर रेती सें, अभिषेक यादव नाम का एक युवक घटना के दिन सें ही लापता था! जिसकी गुमशुदा रिपोर्ट लिखाने के लिए थाने में उसका पिता रामऔतार पहुँचा था! लेकिन मामला आरसी मिशन, और रोज़ा थाने के बीच में ही फंस कर रह गया! आख़िरकार आरसी मिशन पुलिस ने 15/फरवरी 2021 को पीड़ित पिता की काफ़ी भागदौड़ के बाद, उसके बेटे की गुमशुदगी दर्ज कर, पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था!
सूत्रो के मुताबिक निवर्तमान थाना प्रभारी दिनेश शर्मा संभवतः इस अनसुलझे कांड के करीब पहुँच गए थे, सूत्रों की माने तो उन्हें भी जानकारी हो गई थी, कि अधजला शव किसका था, लेकिन उनकी भी जांच रूक गई थी, इसी बीच उनका स्थानांतरण हो गया! उक्त घटन के बाद भी इधर गुमशुदा पुत्र अभिषेक का पिता रामऔतार लगभग पौने दो बर्ष तक अधिकारियो के चक्कर लगाता रहा! अभिषेक का लाचार व बेबस पिता रामऔतार बेटे की लगातार तलाश करता रहा, इसके साथ ही उसे शक था, कि अधजला शव, उसके बेटे अभिषेक का ही हो सकता है!
पोस्टमार्टम के दौरान मिले सामान को देखने के लिए पौने दो साल सें वह अधिकारियो के यहां चक्कर लगा रहा था! लगातार उच्चाधिकारियो सें सीधी अपनी गुहार लगा रहे, इस बेबस लाचार पिता के पास सोमवार की शाम सूचना आई,कि मंगलवार की सुबह रोज़ा थाने में पुलिस की मौजूदगी में अधजले शव के पास सें बरामद पुलिंदा खोलकर शिनाख्त कराई जाएगी! तो बेबस पिता सुबह होते ही थाने में पहुँच गया!
#रोज़ा थाने में शिनाख्त कराने में भी हुई हीला हवाली 4/घंटे बाद ढूंढे मिली पोटली!
सुबह सें ही रोज़ा थाने में बैठे बेबस पिता को शिनाख्त कराने में भी पुलिस हीला हवाली करती रही, और जब उसे सुनने को मिला, कि शिनाख्त के लिए रखी गई पोटली ही गायब हो गई है, तो उसने थाने सें ही एक बार नही, करीब तीन बार पुलिस अधीक्षक कार्यालय को फ़ोन किया! तब कहीं जाकर करीब 4 घंटे के इंतजार के बाद, उसे शिनाख्त की पोटली दिखाई गई! पुलिन्दा खुलते ही रामऔतार की आंखों में आंसू आ गए, और बोला साहब, ये सारा सामान उसके गुमशुदा बेटे अभिषेक का ही है!
#बेबस रामऔतार ने बेटे की हत्या कर शव को जलाने का आरोप लगाया!
रोज़ा, मृतक बेटे अभिषेक यादव के सामान की तस्दीक करने के बाद अभिषेक के पिता, राम औतार ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया, कि उसे घटना के दूसरे दिन ही पूरी जानकारी हो चुकी थी, और उसे घटना के चश्मदीदो ने ही पूरी घटना बताई थी! जिसकी उसने पुलिस अधीक्षक सहित, कई बडे़ अधिकारियों को दिए गए प्रार्थना-पत्रो के माध्यम सें जिक्र भी किया और लोगो के नाम भी खोलें लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नही, कि उसने तो यहां तक आरोप लगा दिया, कि पुलिस ने घटना के बाद 5 लोगो को थाने में पकड़कर बंद किया था, जो असली मुलजिम थे, लेकिन राजनीतिक दबाव में पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया, और लगातार इस मामले को दबाने में जुटी रही तथा आज भी इस मामले को दबाने में जुटी हुई है! उसने बताया कि उसका सबसे छोटा बेटा घटना के दिन शाम को घर सें खाना-खाने के लिए निवाजपुर स्थित एक ढाबे पर आया था!
खबर-पत्रकार लवी सिंह!









