
रिपोर्ट BY- फैसल
हरदोई में ‘हरियाणा मार्ग’: क्या फिर लौट आए सपा राज वाले ‘खुशखबरी’ के दिन या आबकारी मंत्री के घर में ही लग गई सेंध?

CRS NEWS हरदोई। कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है, लेकिन हरदोई पुलिस को उम्मीद नहीं रही होगी कि इतिहास इतनी जल्दी, चार अर्टिगा गाड़ियों में लोड होकर, वापस उनके दरवाजे पर हॉर्न बजाने लगेगा।साल 2017 याद कीजिए। जब सूबे में निजाम बदला था, तो समाजवादी पार्टी के राज में बदनाम हो चुके ‘हरियाणवी शराब’ के धंधे पर बाबा का बुल्डोजर और पुलिस का डंडा एक साथ चला था। तब के तेजतर्रार एसपी विपिन मिश्रा को साफ निर्देश थे—इस अवैध धंधे की सिर्फ कमर नहीं तोड़नी है, बल्कि पैर के नाखून तक उखाड़ देने हैं। पुलिस ने तब ऐसी कब्र खोदी कि लगा कि हरदोई से हरियाणा का ‘लिक्विड कनेक्शन’ हमेशा के लिए दफन हो गया।
लेकिन, साहब! ‘योगी-2’ सरकार जब अपने कार्यकाल के आखिरी पड़ाव पर है, तब कछौना थाना क्षेत्र के खजोहना गांव ने जो झांकी दिखाई है, उसने पुलिसिया दावों की हवा निकाल दी है। एक नहीं, दो नहीं… पूरी चार अर्टिगा गाड़ियां और उनमें ठसाठस भरी करीब 4000 बोतलें हरियाणा मार्का अंग्रेजी शराब! इतनी बड़ी खेप देखकर तो आबकारी विभाग के होश फाख्ता हैं और जनता हैरान।
संयोग भी कितना खूबसूरत और तीखा है! यह वही हरदोई जिला है जिसकी पहचान सूबे के आबकारी मंत्री के गृह जनपद के रूप में होती है। अब जब मंत्री जी के अपने ही घर में हरियाणा की शराब अर्टिगा की सवारी कर रही हो, तो सवाल उठना लाजिमी है। लोग दबी जुबान में पूछ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ एक अदद बरामदगी है, या हरदोई की सरजमीं पर कोई गुप्त “शराब कॉरिडोर” चुपचाप फल-फूल रहा था? चर्चाएं तो यह भी हैं कि यह खेप हरदोई के रास्ते ड्राई स्टेट ‘बिहार’ की तरफ सरकने वाली थी। यानी हरदोई सिर्फ गंतव्य नहीं, बल्कि एक बड़ा ट्रांजिट हब बन चुका है।
इस पूरे मामले में सबसे मजेदार और रहस्यमयी मोड़ पुलिस का रवैया है। जो हरदोई पुलिस छोटी सी चोरी पर भी सोशल मीडिया पर छाती ठोककर बड़े-बड़े खुलासे करती है, वो इतनी बड़ी बरामदगी के बाद अचानक ‘मौन व्रत’ पर चली गई है। जिस पुलिस की पहचान तेजतर्रार कार्रवाई और बड़े-बड़े खुलासों से जुड़ी है, वो इस बार प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय फाइलों से फुसफुसाकर बात कर रही है। आखिर इस खामोशी का राज क्या है? किसे बचाने या क्या छिपाने की कोशिश हो रही है?
चर्चाओं के बाजार में इस ‘हरियाणवी सिंडिकेट’ के पीछे कुछ दिलचस्प नाम तैर रहे हैं। इस पूरे खेल के पीछे तथाकथित शांतिदूत जमीर, अम्मार और हंगामे वाले बबलू का नाम सामने आ रहा है। नाम जितने सीधे, काम उतने ही टेढ़े! अब देखना यह है मामला कागजी खानापूर्ति में ही शांत हो जाता है।
चार चमचमाती अर्टिगा गाड़ियां, 4000 बोतलें और पुलिस महकमे में पसरा यह गहरा सन्नाटा… ये महज इत्तेफाक नहीं हो सकता। जनता अब चटखारे लेकर पूछ रही है कि मामला सिर्फ शराब की चंद बोतलों का है, या फिर हरदोई में सपा सरकार के समय वाला वही पुराना ‘सिस्टम’ दोबारा एक्टिव हो गया है, जिसने खाकी और खादी दोनों को अपनी उंगलियों पर नचाना शुरू कर दिया है? अब देखना यह है कि आबकारी मंत्री के इस गढ़ में पुलिस इस ‘शराब कॉरिडोर’ के सरगनाओं के पैर के नाखून उखाड़ती है, या फिर इस सन्नाटे की ओट में धंधा ऐसे ही ‘अर्टिगा’ की रफ्तार से दौड़ता रहेगा!










