उर्दू शायरी की दुनियाँ में बुलन्दी पर रुबीना आयाज का नाम!

शाहजहाँपुर-उर्दू शायरी की दुनिया में रुबीना अयाज़ बड़ा ही जाना पहचाना नाम है! उर्दू अदब और ज़बान के फ़रोग़ के लिए उनकी ख़िदमात से लोग बखूबी वाक़िफ हैं! लखनऊ में पली बढ़ी रुबीना अयाज़ की शायरी में भी, लखनऊ की नफासत और बात कहने का सलीका साफ झलकता है! मोहतरमा लखनऊ जाते समय कुछ देर शाहजहाँपुर रुकी और उनसे गुफ्तगू की गई जिसमें उन्होंने अपनी शायरी के बारे में बताया!
उन्होंने कहा उनके तमाम अशआर उर्दू ज़बान से उनके दिली लगाव का इज़हार करते हैं! मुशायरों और कवि सम्मेलनों में उनकी मौजूदगी प्रोग्राम की कामयाबी की जमानत समझी जाती है! तमाम उर्दू और हिंदी पत्र पत्रिकाओं में उनके कलाम छपते रहते हैं! कनाडा के हेरा फाउंडेशन का कम्युनिटी अवार्ड, रुबरु फाउंडेशन का साहित्य सम्मान, नागरिक सुरक्षा संगठन का लता मंगेशकर सम्मान, प्रिंट मीडिया वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन का अटल रत्न सम्मान, निहारिका साहित्य मंच का नारी शक्ति सम्मान, नागरिक सुरक्षा संगठन का शाहजहाँ बानो ‘याद’ देहलवी सरीखे कई सम्मान उनको अदबी और समाजी ख़िदमात के मिल चुके हैं!
मोहतरमा रुबीना अयाज ने 2017 से अपनी शायरी का सफर शुरू किया और उन्होंने पहला मुशायरा 2017 में पुरानी दिल्ली में पढ़कर उनको हौसला मिला उसके बाद कोलकाता बंगाल नेपाल नागपुर में ऑल इंडिया मुशायरा में बुलाया गया उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में वह मुशायरा में शिरकत कर चुकी हैं उनके चंद शेर हैं “आतिश की आबरू हूँ, मैं गालिब की शान हूँ, मुझे अदब से मिलिए मैं उर्दू जवान हूं, अपना मोहसिन बनाना सबको ठीक नहीं, राज दिल यूँ सबको बताना ठीक नहीं, तमाम इस तरह की गजलें उन्होंने लिखी है अपने इस तरक्की के लिए वह अपनी वालिदा एवं भाई बहनों को दुआएं देती हैं कि उनकी हौसला अफजाई से इस मकाम तक वह पहुंची हैं!








