
CRS NEWS AGENCY:-
गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) से जुड़े विवाद और उनके द्वारा ‘ओरियन’ (Orion) नामक AI रोबोट विकसित करने के दावों पर चर्चा क्यों। न्यूज़ पिंच के रिपोर्टर अभिनव पांडे इस स्थिति की जांच करने के लिए विश्वविद्यालय जाते हैं और रजिस्ट्रार डॉ. एन.के. गौड़ से आधिकारिक बयान लेते हैं।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने ओरियन को अपनी खुद की रचना के रूप में पेश किया था, लेकिन बाद में पता चला कि यह चीन से खरीदा गया एक रोबोट था। इसके कारण राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी और एक AI शिखर सम्मेलन (summit) से बाहर निकलना पड़ा।
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एन.के. गौड़ ने बताया कि एक फैकल्टी सदस्य ने गलती से “डेवलप” (विकसित) शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि उन्हें “डेवलपमेंट के लिए खरीदा गया” (purchased for development) कहना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोबोट इसलिए खरीदा गया था ताकि छात्र रिसर्च कर सकें और बेहतर तकनीक बना सकें।
रजिस्ट्रार ने पुष्टि की कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने छात्रों को AI सीखने और रिसर्च के लिए सर्वोत्तम संसाधन प्रदान करने हेतु एक AI ब्लॉक और प्रयोगशालाओं के लिए ₹350 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
एक और ऐसी ही घटना सामने आई जहाँ एक ड्रोन को विश्वविद्यालय द्वारा “पूरी तरह से इंजीनियर” (end-to-end engineered) करने का दावा किया गया था, जबकि वह वास्तव में दक्षिण कोरियाई ड्रोन था। रजिस्ट्रार ने इसे फिर से “डेवलप” और “डेवलपमेंट” शब्दों के बीच की गलतफहमी बताया।
सिस्टम पर रिपोर्टर की आलोचना
- अभिनव पांडे ने विश्वविद्यालय के उस फैसले की आलोचना की जिसमें उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञता की कमी वाले मास कम्युनिकेशन के प्रोफेसर को AI समिट में प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा। उनका तर्क है कि यह एक प्रणालीगत विफलता है जहाँ शिक्षा प्रणाली में असफलता को स्वीकार नहीं किया जाता, जो नवाचार (innovation) में बाधा डालती है।
अभिनव पांडे ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और छात्रों को प्रयोग करने एवं फेल होने की आजादी देने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि वास्तविक नवाचार हो सके। रजिस्ट्रार ने गलतियों को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे।









