अपने साथ-2 दूसरो का भी ख्याल रखना ही खिमत-ए-खल्क है!
स्वच्छता मिशन पर वहीं काम कर सकते हैं जिन्हे सफाई पसंद हो!


तिलहर/शाहजहाँपुर-घर और मस्जि़द साफ सुथरे रह सकते है़ं तो कब्रिस्तान को साफ रखना भी दीन-ए-जिन्दगी का एक अहम हिस्सा है! इसी सोच़ पर खरा उतरने के लिए साल 2017 से नगर के मोहल्ला नई बस्ती में स्थित सदियों पुराना पश्तैनी कब्रिस्तान की सफाई में नईबस्ती के लोग हर साल, कब्रिस्तान में उगने वाली जंगली घास और कटीली झाड़ियों और ऊँची बाल बाऊंड्री के बाद भी आस पास के घरो से कचरा, गन्दा कपड़ा ही नही बल्कि शराब की कांच की साबुत और टूटी बोतलो को सर्द और गर्म मौसम के बीच यानि फरबरी पहले हफ्ता से होली से एक सप्ताह पूर्व पहले तक काम पूरा कर लिया जाता है!
कब्रिस्तान में ज़नाजा आने और दफन के बाद मुंह हाथ धोने की जरुरत के लिए नल लगवाने तथा खराब होने पर कई वार सही कराने का काम भी जेब से पैसे खर्च कर नई बस्ती के लोग ही कराते आ रहे हैं! कब्रिस्तान में साफ सफाई और जंगली घास व कटीली झाड़िया काटते समय अक्सर कई बार युवा ही नही बल्कि बुजुर्ग भी बुरी तरह घायल होते रहे लेकिन दीन के इस काम को करने का हौसला किसी मे भी कम होता नही देखा!
बताते हैं कि साफ सफाई, स्वच्छता मिशन के तहत हो या जाति तौर पर लेकिन यह वहीं कर सकते हैं जिनका दिल और दिमाग़ दोनो स्वच्छ हो, जिनके दिल-दिमाग़ में गन्दगी भरी हो वे कभी सफाई को पसंद नही करते! हालांकि इस साफ सफाई के बीच कई वार विभिन्न प्रकार के अराजक़ तत्वो द्वारा बांधा(रोड़ा अटकाना) डाली गई लेकिन उनकी हिम्मत कि वे हर साल अपने मुकर्रर बक्त पर इस सफाई को अभियान के रूप में अंजाम इस लिए देते हैं कि साल भर में कब्रिस्तान की हालत जस की तस हो जाती है!







